crimenewspatnarajnitiबिहारराजनीति

आय से 124 प्रतिशत अधिक संपत्ति का भंडाफोड़: 15 गाड़ियों के काफिले के साथ ईओयू की दबिश, भाजपा नेता के छह ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड

पटना। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), पटना की विशेष टीम ने मंगलवार की सुबह एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। केसरिया नगर पंचायत के पूर्व मुख्य पार्षद और वर्तमान में भाजपा के प्रभावशाली नेता माने जाने वाले रजनीश कुमार पाठक उर्फ रिंकू पाठक के मोतिहारी और पटना स्थित छह ठिकानों पर एक साथ सघन छापेमारी की गई। इस औचक और गुप्त कार्रवाई से इलाके के राजनीतिक एवं प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।ईओयू की यह दबिश पूरी तरह से गोपनीय रखी गई थी। मंगलवार अहले सुबह 15 गाड़ियों का काफिला जब मोतिहारी पहुंचा, तो स्थानीय पुलिस को भी इस बड़ी कार्रवाई की पूरी भनक नहीं थी। विशेष निगरानी न्यायालय, पटना से तलाशी का विधिवत वारंट प्राप्त करने के बाद, ईओयू के एएसपी परमेंदर भारती के नेतृत्व में 32 सदस्यीय टीम ने मोर्चा संभाला। इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी दल में चार डीएसपी स्तर के अधिकारी— सीपी यादव, संजय कुमार और सुरेश प्रसाद सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी शामिल थे। दल ने केसरिया बाजार स्थित पेट्रोल पंप के समीप रिंकू पाठक के निजी आवास, युवराज गैस एजेंसी के कार्यालय, गोदाम और केसरिया नगर पंचायत भवन स्थित मुख्य पार्षद कार्यालय को सील कर दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।मोतिहारी के साथ-साथ ईओयू की एक अन्य टीम ने पटना के दानापुर इलाके में भी एक ही समय पर धावा बोला। दानापुर के बालाजी नगर स्थित आलीशान ‘पार्क वेस्ट अपार्टमेंट’ के फ्लैट संख्या बी-101 समेत अन्य संबंधित ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। आर्थिक अपराध इकाई के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, रजनीश कुमार पाठक और उनकी पत्नी किरण देवी (जो वर्तमान में केसरिया नगर पंचायत की मुख्य पार्षद हैं) के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत कार्रवाई की जा रही है। ईओयू थाना कांड संख्या 29/26 के तहत दर्ज प्राथमिकी में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रारंभिक जांच में इस दंपती की ज्ञात और वैध आय के मुकाबले 3 करोड़ 56 लाख 65 हजार 118 रुपये की अधिक संपत्ति के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिले हैं। यह चौंकाने वाली राशि उनकी वास्तविक आय से लगभग 124.81 प्रतिशत अधिक है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।

राजनेता और सफल कारोबारी का चोला ओढ़ने वाले रिंकू पाठक का अतीत आपराधिक पन्नों से जुड़ा रहा है। स्थानीय सूत्रों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, रिंकू पाठक एक समय में उत्तर बिहार के कुख्यात अपराधी मुकेश पाठक का बेहद करीबी और ‘राइट हैंड’ माना जाता था। वह मुकेश पाठक के गिरोह के लिए रंगदारी वसूलने का काम करता था। रंगदारी और अन्य आपराधिक मामलों में रिंकू पाठक सहरसा जेल की हवा भी खा चुका है। आपसी गैंगवार में उस पर जानलेवा हमला (गोलीबारी) भी हो चुका है। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपराध की दुनिया से दूरी बनाते हुए राजनीति में कदम रखा और तेजी से अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया।वहीं, इस पूरी कार्रवाई को लेकर भाजपा नेता रिंकू पाठक ने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। रिंकू ने अपने बयान में कहा, “यह केवल मेरे राजनीतिक विरोधियों की रची गई एक गहरी साजिश है ताकि मेरी छवि धूमिल की जा सके। चूंकि राज्य में हमारी सरकार है, इसलिए मैं कानून और जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग करूंगा। ईओयू की टीम को मेरे ठिकानों से कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है। वे जांच के नाम पर मेरे गैस गोदाम से महज दो लाख रुपये नकद और कुछ पैतृक जमीन के कागजात ही अपने साथ ले गए हैं। जांच पूरी होने दीजिए, सच्चाई खुद-ब-खुद सबके सामने आ जाएगी।”फिलहाल, ईओयू के अधिकारी जब्त किए गए बैंक खातों के विवरण, निवेश के कागजात, जमीन की रजिस्ट्रियों और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों का सूक्ष्मता से मिलान कर रहे हैं। जांच पूरी होने और दस्तावेजों के तकनीकी सत्यापन के बाद ही ईओयू मुख्यालय द्वारा इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button