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यूपी चुनाव 2027: बड़े नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी, BJP की रणनीति पर मंथन तेज

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संगठन स्तर पर बैठकों और चुनावी रणनीति पर लगातार मंथन चल रहा है। पार्टी ने हाल के महीनों में संगठनात्मक बदलाव भी किए हैं और अब जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

दावा किया जा रहा है कि 2022 की तरह इस बार भी बीजेपी अपने कई बड़े चेहरों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतार सकती है। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के चुनाव लड़ने की चर्चा है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और मंत्रियों पर भी नजर

बीजेपी इस बार अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को भी चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा योगी सरकार के कुछ कैबिनेट मंत्रियों को भी विधानसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है।पार्टी के पूर्व सांसदों को टिकट देने पर भी मंथन चलने की बात सामने आ रही है। साथ ही संगठन के कई पदाधिकारियों को भी चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी बताई जा रही है।हालांकि, इन संभावित उम्मीदवारों और सीटों को लेकर बीजेपी की ओर से अभी कोई अंतिम आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर शहर सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।

वहीं, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी की सिराथू सीट से मैदान में उतरे थे, जहां उन्हें पल्लवी पटेल के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। ब्रजेश पाठक ने लखनऊ कैंट सीट से चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को हराकर विधानसभा पहुंचे थे।2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के प्रदर्शन में गिरावट के बाद पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को नए सिरे से सक्रिय करना शुरू कर दिया है। हालिया बैठकों में बूथ स्तर की तैयारियों, संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई है।

सितंबर 2026 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के लिए नए चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति भी की है। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य का दौरा कर संगठन की तैयारियों और चुनावी चुनौतियों पर चर्चा शुरू कर दी है।

अब पार्टी की नजर उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने पर है। बड़े नेताओं को सीधे चुनावी मैदान में उतारने की चर्चा इसी व्यापक चुनावी तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है।

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