
पटना। बिहार की राजनीति में दलित आरक्षण और ‘कोटे में कोटा’ को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बयानों पर पलटवार करते हुए बिहार के लघु जल संसाधन मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के नेता डॉ. संतोष कुमार सुमन ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने चिराग को चुनौती देते हुए कहा, “हमारी किताब खुली है, अब आप अपनी किताब खोलिए और जनता को काम का हिसाब दीजिए। संतोष सुमन ने बिना नाम लिए तंज कसा कि जो लोग छह दशक तक सत्ता के केंद्र में रहे और फैसलों में भागीदार रहे, वे आज महादलितों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और दूसरों से हिसाब मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सिर्फ पद पाना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाना है।
दशकों तक सत्ता में रहने वाले दें जवाब
सुमन ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि उनकी सरकार ने हमेशा अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए काम किया। उनके अनुसार, उस दौरान 1.95 लाख भूमिहीन महादलित परिवारों को आवासीय प्लॉट दिए गए और 5,717 एकड़ से अधिक भूमि का वितरण किया गया। शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर 14.71 लाख बच्चों को मुख्यमंत्री महादलित पोशाक योजना का सीधा लाभ मिला तथा दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के तहत 2.19 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं को सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए 9,875 ‘विकास मित्र’ बहाल किए गए और ‘विकास रजिस्टर’ के जरिए योजनाओं की जमीनी निगरानी की गई।
आरक्षण पर वैचारिक टकराव
विवाद की जड़ एससी-एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने का मुद्दा है, जिसका चिराग पासवान कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव है और क्रीमी लेयर की वकालत करने वालों को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके विपरीत, संतोष सुमन का स्पष्ट कहना है कि ‘कोटे में कोटा’ का उद्देश्य किसी का हक छीनना नहीं, बल्कि उन अति-वंचित महादलित समुदायों तक लाभ पहुंचाना है जो आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं।



