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अनंत सिंह की बगावत पर गिरेगी गाज? मंत्री श्रवण कुमार के एक बयान ने बढ़ा दी सियासी धड़कनें!

"पार्टी देख रही है मामला..." अनंत सिंह के बागी तेवर पर मंत्री श्रवण कुमार का 'अलर्ट', क्या अब होगा एक्शन?

पटना।बिहार में आगामी विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की सरगर्मियों के बीच सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के संभावित उम्मीदवार और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर बगावती तेवर अपना लिए हैं। अनंत सिंह के इस खुले विरोध ने जदयू के भीतर अनुशासन और एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिक गई हैं कि क्या विधायक पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी? विधायक अनंत सिंह ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है कि वे एमएलसी चुनाव में नीरज कुमार के समर्थन में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे न केवल खुद नीरज कुमार का विरोध करेंगे, बल्कि अपने समर्थकों और वोटरों से भी किसी अन्य प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील करेंगे। एक मौजूदा विधायक द्वारा अपनी ही पार्टी के संभावित उम्मीदवार का यूं सरेआम विरोध करना जदयू की अंदरूनी राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला चुका है। यह सीधा टकराव पार्टी की चुनावी रणनीति और स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

नीरज के लिए नहीं मांगेंगे वोट

इस सियासी बवाल पर जदयू के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री श्रवण कुमार ने बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। अनंत सिंह के रुख पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जदयू के सर्वमान्य नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं और इस मसले पर अंतिम फैसला वही लेंगे। उन्होंने दावा किया कि एनडीए और जदयू में सब कुछ प्रेम और भाईचारे से चल रहा है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि अनंत सिंह के बयानों को नेतृत्व पूरी गंभीरता से देख रहा है। श्रवण कुमार ने कहा कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रही है और जल्द ही इस पर निर्णय सामने आ जाएगा।

मंत्री श्रवण कुमार का सधा हुआ जवाब

राजनीतिक जानकारों की मानें तो चुनाव के ऐन वक्त पर यह कलह पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है, क्योंकि अनंत सिंह का अपने क्षेत्र में एक मजबूत जनाधार है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या शीर्ष नेतृत्व चुनाव से पहले बीच-बचाव करते हुए दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने का प्रयास करेगा ताकि वोटों का बिखराव न हो सके? दूसरी तरफ पार्टी अनुशासन का भी बड़ा सवाल है। क्या पार्टी नेतृत्व अपने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी को घोर अनुशासनहीनता मानकर कड़ा रुख अपनाएगा और अनंत सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा?फिलहाल, गेंद पूरी तरह से पार्टी आलाकमान के पाले में है। बिहार के सियासी गलियारों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या बगावत की इस चिंगारी को समय रहते शांत कर लिया जाता है या फिर बात किसी कड़ी कार्रवाई तक पहुंचती है।

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