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सीतामढ़ी में प्रशांत किशोर की हुंकार: कहा- यह वोट सरकार बनाने का नहीं, बल्कि व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का है

पटना। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने सीतामढ़ी में आयोजित एक विशाल शिक्षक-स्नातक संवाद कार्यक्रम में मौजूदा व्यवस्था पर जोरदार हमला बोला है। आगामी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन को लेकर उन्होंने कहा कि यह चुनाव महज सरकार बनाने या गिराने के लिए नहीं है, बल्कि सालों से चली आ रही लचर व्यवस्था को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का हथियार है। उनके इस बयान ने राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। पीके ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य बिहार की राजनीति की दशा को पूरी तरह से बदलना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जब तक हुक्मरानों के मन में जनता का डर नहीं होगा, तब तक बिहार में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षकों और स्नातकों से आह्वान किया कि वे अपने वोट की ताकत को पहचानें। पीके ने कहा, “अगर जनता किसी नेता को वोट देकर सत्ता के शीर्ष पर बैठा सकती है, तो काम नहीं करने पर उसे कुर्सी से खींचकर नीचे भी उतार सकती है।” उन्होंने दावा किया कि यह चुनाव उन नेताओं की नींद उड़ा देगा, जिन्हें लगता है कि जनता सिर्फ मूकदर्शक है।

सत्ताधीशों के मन में पैदा करना होगा डर

शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने शिक्षकों की मांग का समर्थन करते हुए उन्हें सातवां वेतनमान दिलाने का भरोसा दिया। इसके साथ ही, बेरोजगारी झेल रहे युवाओं को साधते हुए उन्होंने स्नातकों के लिए 10 हजार नौकरियां सुनिश्चित कराने की बात मजबूती से रखी। पीके का यह वादा सीधे उस वर्ग को प्रभावित कर रहा है जो लंबे समय से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति के संवेदनशील मुद्दे ‘जातिवाद’ पर भी प्रहार किया। उन्होंने एनडीए और राजद दोनों को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि ये पार्टियां केवल जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगकर जनता को बरगलाती हैं। पीके ने कहा, “जन सुराज जाति के आधार पर राजनीति नहीं करता। नेताओं को जाति की बजाय जनता के हितों की चिंता करनी चाहिए।” उन्होंने तंज कसा कि कई नेता जनता के भविष्य की बजाय सिर्फ अपनी कुर्सी और बच्चों का भविष्य संवारने में लगे हुए हैं।

राजद और एनडीए पर जातिवाद का आरोप

प्रशांत किशोर के इन आक्रामक बयानों के बाद शिक्षक-स्नातक निर्वाचन को लेकर चुनावी चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि पीके जिस तरह शिक्षकों और स्नातकों के असल मुद्दों को उठाकर एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों को सीधे चुनौती दे रहे हैं, उससे बिहार की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। जनता अब पूरी तरह से एक नए बदलाव के मूड में नजर आ रही है।

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