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छात्र आंदोलन पर JDU का पलटवार, राजीव रंजन बोले- ‘परीक्षा की तैयारी करें, राजनीतिक उकसावे में न आएं’

पटना में छात्रों के लगातार जारी आंदोलन के बीच जेडीयू ने प्रदर्शनकारियों के रुख पर सवाल उठाया है। मंगलवार, 25 अगस्त को जेडीयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उनमें उन्हें कोई ठोस या तार्किक वजह नजर नहीं आती। उन्होंने छात्रों से आंदोलन की जगह अपनी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान देने की अपील की।

‘TRE-4 में 32 हजार से ज्यादा पद तय’

राजीव रंजन ने कहा कि TRE-4 के लिए 32 हजार से अधिक रिक्त पद निर्धारित किए जा चुके हैं और परीक्षा दो चरणों में कराने की व्यवस्था बनाई गई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य में कड़ा कानून भी बनाया गया है।

जेडीयू नेता के मुताबिक, पेपर लीक से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति भी गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी।

उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक दल के बहकावे में आकर आंदोलन का हिस्सा बनने के बजाय परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। उनका कहना था कि छात्रों को अपने भविष्य के साथ-साथ राज्य और देश के विकास में भी योगदान देना चाहिए।

CM आवास घेरने निकले छात्र

दरअसल, मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए सड़क पर उतरे। छात्रों ने गांधी मैदान से मार्च शुरू किया और जेपी गोलंबर होते हुए आगे बढ़े। डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। छात्रों ने कुछ बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई।

कई मांगों को लेकर लंबे समय से धरना

पटना के गर्दनीबाग में छात्र पिछले कई सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में BPSC TRE-4 में एकल परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, BSSC की लंबित परीक्षाओं का आयोजन और हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को समान अवसर देना शामिल है।

छात्रों ने BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं।

ऐसे में छात्र संगठनों के आंदोलन और सरकार व सत्तारूढ़ दल के जवाब के बीच अब विवाद और बढ़ता नजर आ रहा है।

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