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पाटलिपुत्र स्टेशन बवाल पर गरमाई राजनीति, मंत्री ने दिए जांच के आदेश

पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर मद्य निषेध सिपाही भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों द्वारा किए गए हंगामे और पथराव की घटना अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। जहां सरकार ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जांच की बात कही है, वहीं विपक्ष ने प्रशासनिक विफलता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

जानकारी के मुताबिक, मद्य निषेध सिपाही भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए हजारों अभ्यर्थी पाटलिपुत्र स्टेशन पहुंचे थे। भारी भीड़ और व्यवस्थाओं में कमी को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ी, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और हंगामे के साथ पथराव की घटना सामने आई।

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

वहीं मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के मंत्री मदन सहनी ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि मामले की गहन जांच की जाएगी और यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं कुछ असामाजिक तत्व छात्रों के बीच शामिल होकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश तो नहीं कर रहे थे।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी छात्रों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद से निकाला जा सकता है, हिंसा से नहीं।

इस बीच जेडीयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने घटना को चिंताजनक बताते हुए कहा कि युवाओं को भड़काने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उनका आरोप है कि कुछ राजनीतिक दलों के भड़काऊ बयानों का असर युवाओं पर पड़ रहा है, जिससे वे गलत दिशा में जा रहे हैं।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार और रेलवे प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, जिसकी वजह से अभ्यर्थियों में आक्रोश बढ़ा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।

राजद ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, बेरोजगारी और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है, जबकि सरकार केवल बयान देने तक सीमित है।

घटना के बाद अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि स्टेशन पर हुई हिंसा के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

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