
पटना। हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी ने सेवाकाल में दूसरी शादी की अनुमति के लिए आवेदन किया था, तो केवल औपचारिक स्वीकृति न मिलने के आधार पर उसकी दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने सीतामढ़ी निवासी कुसुम देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जल संसाधन विभाग के 5 फरवरी 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बिना अनुमति दूसरी शादी का हवाला देकर पेंशन का दावा खारिज किया गया था।मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता के पति जय लाल साह विभाग में ग्रेड-III क्लर्क थे और 17 अप्रैल 2009 को उनका निधन हो गया था। सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह बात आई कि दिवंगत कर्मचारी ने 28 फरवरी 1982 को ही दूसरी शादी के लिए सक्षम प्राधिकारी को बाकायदा आवेदन दे दिया था, लेकिन विभाग ने इस महत्वपूर्ण साक्ष्य की अनदेखी की। इसके अलावा, मृत कर्मचारी की पहली पत्नी का निधन भी 17 दिसंबर 2009 को हो चुका है। दूसरी पत्नी कुसुम देवी से उनके छह बच्चे (दो बेटे और चार बेटियां) हैं और वे लंबे समय तक समाज में पति-पत्नी के रूप में साथ रहे।हाईकोर्ट ने बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 23(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी की दूसरी शादी पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है; विशेष परिस्थितियों में सरकार इसकी अनुमति दे सकती है। अदालत ने मुख्य अभियंता को निर्देश दिया है कि 1982 के अनुमति आवेदन सहित सभी सही और प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करते हुए एक कारणयुक्त नया आदेश पारित करें। साथ ही, कानून के तहत याचिकाकर्ता को पारिवारिक पेंशन का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया गया है।



