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बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार: टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह बांधा गत्ता, सदर अस्पताल की बड़ी लापरवाही

टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह बांधा गत्ता, सदर अस्पताल की बड़ी लापरवाही

पटना। सूबे में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावों की हकीकत एक बार फिर जहानाबाद सदर अस्पताल में बेनकाब हो गई है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे दो किशोरों के टूटे पैर में प्लास्टर चढ़ाने या मेडिकल स्प्लिंट लगाने के बजाय स्वास्थ्य कर्मियों ने दवा के खाली गत्ते (कार्टन) को काटकर बांध दिया। संवेदनहीनता की हद तो तब पार हो गई जब प्राथमिक उपचार के नाम पर यह रस्म अदायगी कर दोनों मरीजों को आनन-फानन में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया गया। इस घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और सिस्टम की घोर लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुलासगंज थाना क्षेत्र के धरमपुर मोड़ के समीप दो तेज रफ्तार बाइकों के बीच सीधी और जोरदार टक्कर हो गई। इस भीषण हादसे में चार किशोर बुरी तरह घायल हो गए। इनमें रामगंज निवासी प्रह्लाद कुमार और धरमपुर निवासी राजा कुमार के पैरों में गंभीर फ्रैक्चर आया था। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से दोनों गंभीर घायलों को दोपहर के समय जहानाबाद सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। परिजनों को उम्मीद थी कि जिला अस्पताल में उन्हें त्वरित और मुकम्मल इलाज मिलेगा, लेकिन वहां का नजारा देखकर वे दंग रह गए।

सड़क हादसे में घायल हुए थे किशोर

यह वाकया इस बात का प्रमाण है कि करोड़ों रुपये के बजट और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर मरीजों को क्या मिल रहा है। सदर अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण केंद्र में जहां हड्डी रोग विशेषज्ञ से लेकर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर तैनात होते हैं, वहां एक साधारण स्प्लिंट या प्लास्टर तक उपलब्ध न होना या उसका उपयोग न करना एक आपराधिक लापरवाही है।

डीएम ने लिया संज्ञान, 24 घंटे में मांगा स्पष्टीकरण

मामले के तूल पकड़ने और कार्टन बंधे पैरों की तस्वीर मीडिया में वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी छिरिंग वाई भूटिया ने इस शर्मनाक कृत्य को बेहद गंभीरता से लिया है। डीएम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की है और इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात संबंधित चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को शोकॉज (कारण बताओ) नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस अमानवीय लापरवाही के लिए असली दोषी कौन है, लेकिन फिलहाल इस घटना ने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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