
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के लिए चलाई जा रही सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना एक बार फिर भ्रष्टाचार की गहरी भेंट चढ़ गई है। जिले के ढाका प्रखंड अंतर्गत करमवा पंचायत में एक ऐसे सनसनीखेज फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे की नींद उड़ा दी है। यहां धरातल पर योजना स्थल पर एक भी मजदूर काम करता हुआ नहीं पाया गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल निगरानी तंत्र में रोजाना 181 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी खजाने को खुलेआम चूना लगाया जा रहा था। इस महाघोटाले का भंडाफोड़ सिकरहना अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) विजय कुमार की औचक जांच में हुआ, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। एसडीओ विजय कुमार को ढाका प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर अनियमिताओं की लगातार गुप्त शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना के आलोक में उन्होंने करमवा पंचायत में स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान पंचायत भवन परिसर में चल रहे मिट्टी भराई एवं पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य, तथा बहलोलपुर में नाला और पीसीसी निर्माण कार्य का जायजा लिया गया। एसडीओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पहली योजना (पंचायत भवन) में 11 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन 133 मजदूरों की उपस्थिति ऐप पर दर्ज की जा रही थी। वहीं, दूसरी योजना (बहलोलपुर) में 15 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन 48 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भारी पैमाने पर सरकारी राशि गबन करने की साजिश रची गई थी। दोनों ही जगहों पर मौके से एक भी मजदूर उपस्थित नहीं मिला।
डिजिटल हाजिरी के नाम पर सिस्टम से हाईटेक खिलवाड़
मामले की गंभीरता और सरकारी राशि के खुलेआम गबन के प्रयास को देखते हुए एसडीओ ने तत्काल सख्त कदम उठाए। उनके निर्देश पर मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) द्वारा ढाका थाने में कुल तीन लोगों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई है। नामजद आरोपियों में रूपमाला देवी, लालबाबू पासवान (पंचायत समिति सदस्य के पति) और मो. रिजवान शामिल हैं। पुलिस ने त्वरित दबिश देते हुए मुख्य सूत्रधार पंचायत समिति पति लालबाबू पासवान को उस मोबाइल फोन के साथ हिरासत में ले लिया है, जिसका इस्तेमाल इस डिजिटल फर्जीवाड़े में किया जा रहा था। पुलिस अब जब्त मोबाइल की फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ कर इस गिरोह से जुड़े अन्य सफेदपोशों की तलाश कर रही है। सिकरहना एसडीओ विजय कुमार ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने वाली सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में भारी गड़बड़ी पाई गई है। स्थलीय जांच में मजदूरों का न मिलना और ऐप पर उपस्थिति दर्ज होना एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। एसडीओ ने बताया कि पूरी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी (डीएम) को सौंप दी गई है। इस फर्जीवाड़े में संलिप्त अन्य पंचायत प्रतिनिधियों, रोजगार सेवकों और विभागीय अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
ऐप पर बन रही थी 181 की हाजिरी!
जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। करमवा पंचायत में हुए इस खुलासे के बाद अब ढाका प्रखंड सहित जिले के अन्य प्रखंडों में चल रही मनरेगा योजनाओं पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि असली मजदूरों को काम नहीं मिलता और बिचौलियों के माध्यम से कागजों पर ही योजनाएं पूरी कर ली जाती हैं। इस घटना ने साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए लाए गए डिजिटल सिस्टम को भी भ्रष्ट तंत्र ने हैक कर लिया है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे कितनी सख्त नजीर पेश करता है, ताकि भविष्य में गरीबों के हक की राशि लूटने वालों में खौफ पैदा हो सके।।



