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बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की पहल ला रही रंग, मंत्री निशांत के काम की राज्यपाल ने की सराहना

पटना: बिहार के स्वास्थ्य विभाग की कमान संभालने के बाद से स्वास्थ्य मंत्री निशांत की सक्रियता अब जमीन पर रंग लाने लगी है। अस्पतालों के औचक निरीक्षण से लेकर मरीजों से सीधे संवाद और बुनियादी ढांचे के विस्तार तक, उनके द्वारा उठाए गए कदमों की चौतरफा चर्चा हो रही है। हाल ही में बिहार लोक भवन में आयोजित ‘टीबी मुक्त बिहार’ संगोष्ठी में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने भी स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि के प्रयासों की खुले मंच से सराहना की। राज्यपाल ने पिछले तीन-चार महीनों में टीबी उन्मूलन, मोबाइल एक्स-रे स्क्रीनिंग और अभियान के सभी जिलों तक विस्तार को एक बड़ी उपलब्धि बताया।

जिला स्तर पर सुविधाओं का हो रहा विस्तार

स्वास्थ्य मंत्री निशांत का मुख्य फोकस इस बात पर है कि छोटी-छोटी बीमारियों के लिए मरीजों को बड़े अस्पतालों की ओर रुख न करना पड़े। नई सरकार के गठन के बाद मंत्री के निर्देश पर राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों में 105 नए आईसीयू (ICU) बेड और 70 वेंटिलेटर युक्त गहन चिकित्सा इकाइयां शुरू की गई हैं। अब राज्य में कुल 190 आईसीयू बेड और 120 वेंटिलेटर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, 55 में से 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा शुरू हो चुकी है।

अस्पतालों पर बढ़ा जनता का भरोसा, सर्जरी के आंकड़ों में उछाल

स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए मानव संसाधन को भी मजबूती दी गई है। राज्य में 200 विशेषज्ञ चिकित्सकों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 142 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा 683 ओटी असिस्टेंट, 100 ईसीजी टेक्नीशियन, 792 ड्रेसर और 644 एक्स-रे टेक्नीशियन समेत कुल 2,219 तकनीकी कर्मियों की तैनाती कर अस्पतालों में सर्जरी व जांच की क्षमता बढ़ाई गई है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के मामले में बिहार पूरे देश में लगातार 23वें महीने पहले पायदान पर बना हुआ है। वर्तमान में 504 प्रकार की दवाएं और 132 प्रकार के मेडिकल डिवाइस मुफ्त दिए जा रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष की वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 और मौजूदा वर्ष में अब तक हजारों लाभार्थियों के लिए करोड़ों रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

टीबी और एनीमिया के खिलाफ महाभियान

‘टीबी मुक्त बिहार’ के तहत 3.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर लगभग 3.97 लाख मरीजों की पहचान की गई है, जिन्हें निक्षय पोषण योजना के तहत 1,000 रुपये प्रतिमाह और फूड बास्केट दिए जा रहे हैं। ‘एनीमिया मुक्त बिहार’ के तहत 1.20 करोड़ लाभार्थियों की डिजिटल हीमोग्लोबिन जांच का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के इन तमाम प्रयासों का सीधा असर आंकड़ों में दिख रहा है। सितंबर 2026 में जिला अस्पतालों के आईपीडी (IPD) में 49,450 मरीज भर्ती हुए, जबकि जून में यह संख्या महज 26,443 थी। सर्जरी के मामलों में भी भारी उछाल आया है। जून से सितंबर के बीच गायनी सर्जरी 2,156 से बढ़कर 6,131 और जनरल सर्जरी 174 से बढ़कर 1,420 हो गई।मेडिकल शिक्षा के मोर्चे पर भी छपरा और समस्तीपुर मेडिकल कॉलेज में 50-50 सीटों के साथ सत्र 2026-27 से पढ़ाई शुरू होने की अनुमति मिल गई है। एम्स (AIIMS) पटना के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण और पीएमसीएच को 5,462 बेड का अस्पताल बनाने का काम भी तेज गति से चल रहा है। मंत्री निशांत की इस ग्राउंड-जीरो कार्यशैली से सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था एक नए और सकारात्मक दौर में प्रवेश कर चुकी है।

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