newsrajniti

श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध: सीएम योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री ने बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तार देने, ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को और मजबूत बनाने, औद्योगिक शहरों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र विकसित करने और रोजगार मिशन को अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।

शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर रोजगार उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जाए और उनके पुनर्वास को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने निजी क्षेत्र के सहयोग से बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया। वर्ष 2020 में शुरू हुई बाल श्रमिक विद्या योजना फिलहाल 20 जिलों में संचालित है, जिसे अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को तकनीक आधारित रोजगार और जनसेवा का अभिनव मॉडल बताते हुए इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। इस व्यवस्था के तहत लोग मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के जरिए घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर हजारों सेवा प्रदाता और कुशल कामगार पंजीकृत हैं।

उन्होंने सरकारी विभागों में भी जरूरत के अनुसार सेवामित्र व्यवस्था के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बैठक में श्रम विभाग के संस्थागत सुधारों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि प्रदेश में कारखानों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और श्रम सुधारों के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश को ‘टॉप अचीवर’ के रूप में मान्यता मिली है।

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों यानी ‘लेबर अड्डों’ को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों को सिर्फ श्रमिकों के जुटान स्थल नहीं, बल्कि सहायता और सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही बाहर से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा।

कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है। यहां कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन जैसे ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि युवाओं को स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के जरिए देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

बैठक में बताया गया कि रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रमों के जरिए लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं, जबकि हजारों युवाओं का चयन विदेशों में रोजगार के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोजगार मेलों को औपचारिकता तक सीमित न रखकर उद्योगों की वास्तविक मांग और युवाओं की क्षमता से जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य जैसे देशों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इसके लिए जापानी, जर्मन और अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सेवायोजन विभाग को आधुनिक और डिजिटल रोजगार तंत्र के रूप में विकसित करने के निर्देश देते हुए रोजगार संगम पोर्टल में एआई आधारित सेवाएं, डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउंसलिंग प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया।

Related Articles

Back to top button