
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण को लेकर पुलिस महकमे ने एक बड़ी पहल की है। अब किसी बच्चे पर संकट आने, उसके लापता होने या उत्पीड़न का मामला सामने आने पर पीड़ित परिवार को थाने के सामान्य चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बच्चों की त्वरित मदद के लिए जिले के 52 थाना क्षेत्रों में विशेष रूप से ‘बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी’ (सीडब्ल्यूपीओ) की तैनाती कर दी गई है।सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि पुलिस प्रशासन ने इन सभी तैनात पदाधिकारियों के नाम और उनके आधिकारिक मोबाइल नंबरों की सूची पूरी तरह सार्वजनिक कर दी है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि मुसीबत के समय कोई भी व्यक्ति, अभिभावक या स्वयं बच्चा बिना किसी झिझक के सीधे जिम्मेदार अधिकारी तक अपनी बात पहुंचा सकेगा। अक्सर देखा जाता है कि थाने की भीड़भाड़ और मुकदमों के बोझ तले बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामले शुरुआत में वह गति नहीं पकड़ पाते, जिसकी उन्हें दरकार होती है। यह नई व्यवस्था इसी व्यवस्थागत खाई को पाटने का काम करेगी।
आम जनता के लिए अधिकारियों के नाम व मोबाइल नंबर जारी।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात की इस विशेष पहल को बाल अधिकारों की दिशा में एक बेहद अहम कदम माना जा रहा है। पुलिस का संदेश स्पष्ट है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले के नगर, मुफस्सिल, महिला थाना, छतौनी, बंजरिया, पिपराकोठी, चकिया, मेहसी, तुरकौलिया, रघुनाथपुर, पकड़ीदयाल, पताही, मधुबन और केसरिया सहित सभी 52 पुलिस इकाइयों में यह प्रणाली लागू कर दी गई है।बाल अपराध या गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी परिवार का चिराग अचानक लापता हो जाए, तो परिजनों की पहली चिंता यही होती है कि वे किससे गुहार लगाएं। ऐसे में सीडब्ल्यूपीओ का सीधा नंबर होने से संपर्क का असमंजस खत्म हो जाएगा। एक फोन कॉल करते ही तंत्र तुरंत हरकत में आ जाएगा और बच्चे के संरक्षण की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सकेगी।
जिले के 52 थानों में सीडब्ल्यूपीओ की हुई विशेष तैनाती।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात की इस विशेष पहल को बाल अधिकारों की दिशा में एक बेहद अहम कदम माना जा रहा है। पुलिस का संदेश स्पष्ट है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले के नगर, मुफस्सिल, महिला थाना, छतौनी, बंजरिया, पिपराकोठी, चकिया, मेहसी, तुरकौलिया, रघुनाथपुर, पकड़ीदयाल, पताही, मधुबन और केसरिया सहित सभी 52 पुलिस इकाइयों में यह प्रणाली लागू कर दी गई है।बाल अपराध या गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी परिवार का चिराग अचानक लापता हो जाए, तो परिजनों की पहली चिंता यही होती है कि वे किससे गुहार लगाएं। ऐसे में सीडब्ल्यूपीओ का सीधा नंबर होने से संपर्क का असमंजस खत्म हो जाएगा। एक फोन कॉल करते ही तंत्र तुरंत हरकत में आ जाएगा और बच्चे के संरक्षण की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सकेगी।



