
पटना की पेयजल व्यवस्था आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने वाली है। राजधानी में बढ़ती आबादी, तेजी से नीचे जा रहे भू-जल स्तर और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बिहार सरकार ने एक बड़े जलापूर्ति प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है। इस योजना के लागू होने के बाद लोगों की बोरिंग और भू-जल पर निर्भरता काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इसके बजाय गंगा का शुद्ध और ट्रीट किया गया पानी पाइपलाइन के जरिए सीधे हर घर तक पहुंचाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसे केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत लागू किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट का प्रारंभिक सर्वे बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) पूरा कर चुका है। योजना की खास बात यह है कि इसे केवल मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि वर्ष 2059 तक की अनुमानित आबादी के हिसाब से तैयार किया गया है। अनुमान है कि अगले 35 वर्षों में पटना की आबादी 33 लाख से अधिक हो जाएगी। इसी को देखते हुए जलापूर्ति प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि भविष्य में भी लोगों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।
योजना के तहत पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों में नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। गंगा से पानी लेकर उसे अत्याधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाएगा और फिर घर-घर तक सप्लाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को प्रतिदिन 155.25 लीटर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। सरकारी अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2029 तक पटना की आबादी करीब 23.81 लाख होगी, जिसके लिए प्रतिदिन 406.259 मिलियन लीटर पानी की जरूरत होगी। वर्ष 2044 तक यह मांग बढ़कर 477.899 मिलियन लीटर प्रतिदिन हो जाएगी, जबकि वर्ष 2059 तक लगभग 33.10 लाख आबादी के लिए 561.830 मिलियन लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित की जाएगी।
पूरे प्रोजेक्ट के तहत एक आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, दो इंटेक वेल और कई नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कुल 57 भूखंडों की आवश्यकता है, जिनमें से 44 सरकारी जमीनों की पहचान की जा चुकी है। बांकीपुर और पटना सिटी क्षेत्र में सभी जरूरी जमीन उपलब्ध है। कंकड़बाग क्षेत्र में 8 में से 7 स्थानों की पहचान हो चुकी है, जबकि पाटलिपुत्र इलाके में 10 में से 5 स्थान तय किए गए हैं। हालांकि अजीमाबाद और नूतन राजधानी क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी बाकी है।
गंगा से पानी लेने के लिए दीघा और गायघाट में आधुनिक इंटेक वेल और फ्लोटिंग जेटी बनाई जाएगी। दोनों स्थानों पर 281 एमएलडी क्षमता वाले इंटेक वेल स्थापित होंगे। दीघा से प्रतिदिन लगभग 337.5 एमएलडी पानी लिया जा सकेगा, जिसे ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध करने के बाद पूरे शहर में वितरित किया जाएगा। गायघाट से भी इसी क्षमता के साथ जलापूर्ति की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल नई जलापूर्ति व्यवस्था नहीं, बल्कि पटना के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके पूरा होने के बाद भू-जल पर निर्भरता कम होगी, लोगों को बेहतर गुणवत्ता का पेयजल मिलेगा और बढ़ती आबादी के बावजूद आने वाले कई दशकों तक राजधानी में नियमित एवं स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।



