
पटना। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें अब और भी गंभीर रूप लेती जा रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से हाल ही में छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद, अब उनकी विधानसभा सदस्यता को पूरी तरह से समाप्त कराने की कवायद ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। सत्तारूढ़ दल ने अपने इस बागी विधायक के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसी कड़ी में सोमवार को जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बिहार विधानसभा पहुंचकर विधानसभा अध्यक्ष को अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने के संबंध में एक औपचारिक अनुशंसा पत्र सौंपा। इस दौरान उनके साथ बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) संजय गांधी भी मौजूद रहे।पार्टी ने सिर्फ पत्र ही नहीं सौंपा, बल्कि अपने दावों को पुख्ता करने के लिए 10 पन्नों के अकाट्य दस्तावेजी साक्ष्य और कई वीडियो क्लिप्स भी विधानसभा अध्यक्ष के पटल पर रखे हैं। विधानसभा अध्यक्ष को ये तमाम साक्ष्य सौंपने के बाद उमेश कुशवाहा और संजय गांधी ने विधानसभा सचिव से भी विशेष मुलाकात की। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने के संबंध में पार्टी द्वारा पहले सौंपे गए पत्र पर अब तक हुई कार्रवाई और प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।
मोकामा के ‘छोटे सरकार’ पर JDU का फाइनल स्ट्राइक
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में संवैधानिक और कानूनी कार्रवाई तेजी से चल रही है। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह के खिलाफ विधिवत नोटिस तैयार किया जा रहा है और जल्द ही उन्हें यह थमा दिया जाएगा। कुशवाहा ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि संविधान और नियम-कानून के तहत इस मामले में कठोर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास सुरक्षित है। उन्होंने जोर देकर मांग की कि मोकामा विधायक की सदस्यता हर हाल में रद्द होनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने जदयू के संविधान और अनुशासन का घोर उल्लंघन किया है।कुशवाहा ने बताया कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अपनी ही पार्टी के संविधान का सरेआम उल्लंघन करना उसकी सदस्यता समाप्त करने के लिए पर्याप्त और ठोस आधार माना जाता है। अब इस पूरे प्रकरण में बिहार के सियासी हलकों की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के स्तर से होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि सुबूतों के आधार पर स्पीकर जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
क्या छिन जाएगी अनंत सिंह की विधायकी?
विधायक की पत्नी और नेत्री नीलम देवी को पद से हटाए जाने से जुड़े एक सवाल पर उमेश कुशवाहा ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल इस विशिष्ट संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने अनंत सिंह और नीलम देवी दोनों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। कुशवाहा ने कहा कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी, दोनों ही लगातार पार्टी लाइन से बाहर जाकर काम कर रहे थे। दोनों ने चुनाव के दौरान खुलेआम जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार किया और अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को हराने का हरसंभव प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब अनुशासनहीनता इस चरम पर पहुंच जाए, तो ऐसी स्थिति में पार्टी के पास कठोर कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने मोकामा विधायक द्वारा लगातार अपशब्दों और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल पर भी गहरी नाराजगी और क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने इसे राजनीतिक शुचिता के खिलाफ बताते हुए कहा कि गाली-गलौज और अपशब्दों का प्रयोग जनता दल यूनाइटेड की संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रहा है। कुशवाहा ने मुख्यमंत्री के आदर्शों का हवाला देते हुए कहा, “हम सभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करते हैं। हम उनके द्वारा दिए गए सुशासन और राजनीतिक संस्कारों का कड़ाई से पालन करते हैं और भविष्य में भी इन्हीं संस्कारों के साथ जनता की सेवा करते रहेंगे। हमारी पार्टी में अमर्यादित आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है।”इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में एक बार फिर से सरगर्मी बढ़ा दी है। मोकामा क्षेत्र में इस राजनीतिक उठापटक के दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। जदयू के इस आक्रामक रुख से यह साफ हो गया है कि पार्टी अब अनुशासनहीनता के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रही है और किसी भी बागी नेता को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं है। अब देखना यह होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस के बाद अनंत सिंह का अगला राजनीतिक या कानूनी कदम क्या होता है।



