
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इंपोर्ट ड्यूटी हटाने का फैसला किया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और आम उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही महंगाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने चीनी के बढ़ते दामों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने महंगाई को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
इंपोर्ट ड्यूटी हटाने के पीछे क्या है सरकार की रणनीति?
सरकार का मानना है कि चीनी पर आयात शुल्क हटाने से विदेशी बाजार से चीनी मंगाना आसान होगा। इससे देश में उपलब्धता बढ़ने और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने इसे उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
विपक्ष ने महंगाई पर सरकार को घेरा
वहीं विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले को लेकर महंगाई का मुद्दा उठाया है। नेताओं का कहना है कि आम जनता पहले से ही जरूरी सामान, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों का दबाव झेल रही है।
पप्पू यादव समेत विपक्षी नेताओं ने एथेनॉल की कीमतों और सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि महंगाई का असर सबसे ज्यादा आम और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
अब सरकार के इंपोर्ट ड्यूटी हटाने के फैसले से चीनी की कीमतों में कितनी कमी आती है और इसका फायदा उपभोक्ताओं तक कितनी जल्दी पहुंचता है, इस पर सभी की नजर है। फिलहाल चीनी के दाम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी घमासान जारी है।



