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शिवहर में डीएम का अनोखा निरीक्षण, हाथ में फीता लेकर खुद नापने लगीं पोखर

शिवहर में जिलाधिकारी प्रतिभा रानी का जमीनी निरीक्षण इन दिनों चर्चा में है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत बनाए गए पोखरों की जांच के दौरान डीएम ने अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति परखी। उन्होंने हाथ में फीता लेकर खेत की पगडंडी पर उतरकर पोखर की लंबाई और चौड़ाई की नाप-जोख की।

डीएम को मौके पर पोखर की संरचना और माप की जांच करते देख वहां मौजूद अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों में हलचल मच गई।

शिकायतों के बाद खुद पहुंचीं मौके पर

मामला तरियानी प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में जल संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए तालाबों और पोखरों से जुड़ा है। इन योजनाओं के निर्माण में अनियमितता की शिकायतें मिलने के बाद जिलाधिकारी ने खुद स्थल निरीक्षण करने का निर्णय लिया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने कागजों में दर्ज विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया। पोखरों की लंबाई, चौड़ाई, गहराई और जलधारण क्षमता के साथ आसपास की स्थिति का भी जायजा लिया गया।डीएम ने तरियानी प्रखंड की अठकोनी पंचायत के बराही में योगेंद्र राय की जमीन पर हुए पोखर खुदाई कार्य का निरीक्षण किया।

इसके अलावा छतौनी पंचायत के वार्ड नंबर-5 में अरधन्ना देवी की जमीन और वार्ड नंबर-14 में ईश्वर दयाल राय की जमीन पर बनाए गए पोखरों की भी जांच की गई।नरवारा पंचायत के वार्ड नंबर-1 में इंदु देवी और अवधेश सिंह की जमीन तथा नरवारा में लोकेश कुमार की जमीन पर निर्मित पोखरों की स्थिति भी देखी गई। वहीं पोजहिया पंचायत के ग्राम पचरा, वार्ड नंबर-11 में प्रकाश कुमार की जमीन पर कराए गए पोखर खुदाई कार्य का भी निरीक्षण किया गया।जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान का उद्देश्य केवल कागजों पर योजनाएं पूरी दिखाना नहीं है। जल संरचनाओं का वास्तविक लाभ लोगों और पर्यावरण को मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन पोखरों के जरिए वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल स्तर में सुधार, स्थानीय जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण जैसे उद्देश्यों को पूरा किया जाना चाहिए।

जल संरचनाओं के नियमित सत्यापन के निर्देश

डीएम ने संबंधित अधिकारियों को जिले में निर्मित सभी जल संरचनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन और निगरानी करने को कहा। साथ ही पोखरों की जलधारण क्षमता लंबे समय तक बनाए रखने के लिए उचित रखरखाव पर भी जोर दिया।

डीएम के इस औचक निरीक्षण से यह संदेश साफ है कि अब सरकारी योजनाओं की निगरानी सिर्फ फाइलों और रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे और रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का जमीन पर सत्यापन भी करेंगे।

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