
पटना। बिहार की सियासत में मोकामा के विधायक अनंत सिंह के खिलाफ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई के बाद से सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि क्या इस हाई-प्रोफाइल निष्कासन को लेकर पार्टी के भीतर कोई अंतर्विरोध या असहमति है? अब इन तमाम अटकलों पर जदयू के वरिष्ठ नेता, विधान पार्षद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले संजय गांधी ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अनंत सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह सभी बड़े नेताओं की सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय है।संजय गांधी ने पार्टी के आंतरिक फैसलों की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि जदयू एक अनुशासित पार्टी है। उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जब भी कोई बड़ा नीतिगत या अनुशासनात्मक फैसला लेते हैं, तो वह सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाता है। ऐसे में अनंत सिंह पर की गई कार्रवाई को लेकर पार्टी के अंदर किसी भी प्रकार की असहमति का सवाल ही पैदा नहीं होता।
अनुशासनहीनता पर बड़ा एक्शन
गौरतलब है कि मोकामा विधायक अनंत सिंह पर लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लग रहे थे। पार्टी नेतृत्व ने उन पर लगातार अनुशासनहीनता बरतने, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित बयानबाजी करने और हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के विरोध में काम करने के गंभीर आरोपों के तहत उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है। संजय गांधी का यह ताजा बयान जदयू नेतृत्व की ओर से इस कठोर कार्रवाई पर एकजुटता दिखाने और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच पार्टी के शीर्ष नेताओं की मुलाकातों का दौर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बीच हाल ही में हुई बातचीत को लेकर जब संजय गांधी से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे बेहद सहजता से लिया। उन्होंने कहा कि दोनों ही नेता पार्टी के वरिष्ठ स्तंभ हैं। उनका एक-दूसरे से मिलना-जुलना स्वाभाविक प्रक्रिया है और इस दौरान निश्चित तौर पर पार्टी व संगठन को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से ललन सिंह की मुलाकात के सवाल पर भी संजय गांधी ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री से केंद्र सरकार के मंत्रियों का मिलना एक सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार है, जहाँ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है। इसे किसी अन्य चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
संजय गांधी ने खोल दिया सबसे बड़ा राज!
बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की एकजुटता को लेकर भी संजय गांधी ने बड़ा दावा किया। यह पूछे जाने पर कि क्या जदयू में सब कुछ ठीक चल रहा है, उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट है। न केवल जदयू, बल्कि पूरे एनडीए गठबंधन में पूरी एकता कायम है।संजय गांधी के इस बयान के गहरे राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। जदयू नेतृत्व ने यह साफ संदेश दे दिया है कि अनुशासनहीनता के मुद्दे पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व एकमत है। मुलाकातों और बैठकों को लेकर विपक्ष द्वारा उड़ाई जा रही अफवाहों को खारिज करते हुए जदयू ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सियासत में एनडीए मजबूती के साथ अपने एजेंडे पर आगे बढ़ रहा है।



