
मोतिहारी । वैशाली जिले के राघोपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे सूबे को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना में 13 लोगों की डूबने से मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर मासूम बच्चे शामिल थे। इस दुखद घटना के बाद सियासी पारा भी चढ़ गया है। बुधवार को पाटलिपुत्र की सांसद और राजद नेत्री मीसा भारती ने राघोपुर पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। शोक संतप्त परिवारों से मिलकर उनका दर्द साझा करने के बाद मीसा भारती का गुस्सा राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर फूट पड़ा। उन्होंने सूबे की सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए इसे ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ करार दिया और प्रशासन पर घोर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।परिजनों से मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने सांसद के सामने प्रशासनिक बदइंतजामी का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद मीसा भारती ने कहा कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार की जमीनी हकीकत भयावह है। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद जब मासूम बच्चों को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब एंबुलेंस में जीवन रक्षक ऑक्सीजन तक मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की हालत भी बदतर थी, जहां पूरे अस्पताल के भरोसे केवल एक ही डॉक्टर मौजूद था और वहां भी ऑक्सीजन व जरूरी दवाओं का घोर अभाव था। घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस और मेडिकल टीम के घटनास्थल पर काफी देर से पहुंचने को लेकर भी उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।
अंधेर नगरी, चौपट राजा…
राज्य की सियासत पर तंज कसते हुए मीसा भारती ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बिहार में पूरी तरह से ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ वाली स्थिति बनी हुई है। जनता ने जिसे चुना और मुख्यमंत्री बनाया, उसी की पीठ में खंजर घोंपकर आज कोई और सत्ता के शीर्ष पर बैठा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान सिर्फ जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर है। वैशाली की जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा नाव चालक पर मुकदमा दर्ज करने की बात पर भी सांसद ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए गरीबों को बलि का बकरा बना रहा है। गंगा किनारे स्थित ‘दियारा’ क्षेत्र में बाढ़ के हालात हैं, यह बात प्रशासन को भली-भांति पता थी। ऐसे में वहां सरकारी नावों का प्रबंध क्यों नहीं किया गया?
सीएम नीतीश और प्रशासन पर जमकर बरसीं मीसा भारती
मीसा ने बताया कि जिस नाव से हादसा हुआ, उसका निचला हिस्सा फटा हुआ था और वह पूरी तरह जर्जर थी। पानी भरने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। उन्होंने मांग की कि सबसे पहले कार्रवाई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों और एंबुलेंस व्यवस्था के जिम्मेदारों पर होनी चाहिए। केंद्र सरकार और बड़े उद्योगपतियों को भी आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ के बावजूद इसे बाढ़ग्रस्त राज्य घोषित नहीं किया गया। पीएम केयर्स फंड में करोड़ों रुपये जमा हैं, लेकिन केंद्र को बिहार की चिंता नहीं है। अडानी, अंबानी और मेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल जैसे उद्योगपतियों ने असम में मदद पहुंचाई, लेकिन बिहार को भुला दिया गया।उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस चुनावी वादे की भी याद दिलाई जिसमें बिहार को बाढ़ मुक्त बनाने की बात कही गई थी। मीसा ने सवाल किया, “जो सरकार लोगों को एक सुरक्षित नाव नहीं दे सकती, वह राज्य को बाढ़ मुक्त कैसे बनाएगी?” अपनी पार्टी की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने बिना मुख्यमंत्री रहे ही 5 लाख युवाओं को नौकरी दी। अगर जनादेश की चोरी न होती तो प्रदेश में और भी नौकरियां व फैक्ट्रियां आतीं। स्थानीय भाजपा नेता की बयानबाजी पर पलटवार करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि यह राजनीति का समय नहीं है, भगवान न करे कि ऐसी विपत्ति किसी दुश्मन के घर भी आए।



