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बिहार विधान परिषद चुनाव: तिरहुत से एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी ने किया नामांकन, युवाओं-शिक्षकों से किए बड़े वादे

पतना। बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव को लेकर तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। इसी क्रम में वर्तमान विधान पार्षद (एमएलसी) बंशीधर ब्रजवासी ने पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में एक बार फिर ताल ठोक दी है। उन्होंने मुजफ्फरपुर स्थित प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय पहुंचकर चुनाव अधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपना औपचारिक नामांकन पर्चा दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ स्थानीय प्रतिनिधियों और समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद रही, जिन्होंने उनके समर्थन में नारेबाजी की और चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण समर्थन जताया।नामांकन प्रक्रिया विधिवत संपन्न होने के बाद कार्यालय परिसर से बाहर आते ही बंशीधर ब्रजवासी ने पत्रकारों से विस्तृत बातचीत की। उन्होंने अपने चुनावी विजन और कार्ययोजना को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के उस प्रबुद्ध वर्ग की मजबूत आवाज बनना है, जो समाज को दिशा देता है। ब्रजवासी ने शिक्षकों, बेरोजगार युवाओं, पत्रकारों और अधिवक्ताओं के अधिकारों और उनकी बुनियादी समस्याओं को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ दोहराया कि स्नातक क्षेत्र की जनसमस्याओं को उन्होंने पिछले कार्यकाल में भी सदन के पटल पर पूरी प्रखरता के साथ उठाया है और आगे भी वे इन गंभीर मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते रहेंगे।

तिरहुत में फिर बजेगा डंका?

वर्तमान एमएलसी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज का युवा रोजगार के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है। इसके साथ ही, शिक्षकों की कई ऐसी जायज मांगें हैं, जिनका अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि तिरहुत की जनता उन्हें दोबारा चुनकर सदन में भेजती है, तो वे युवाओं के रोजगार के नए अवसरों और शिक्षकों के सम्मान के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेंगे। इसके अलावा, समाज के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा व सुविधाओं के साथ-साथ न्यायपालिका के अहम अंग अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए भी उन्होंने विशेष नीतियां लागू करवाने की बात कही।

पिछली बार JDU को चटाई थी धूल

गौरतलब है कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, जिसमें मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जैसे महत्वपूर्ण जिले आते हैं, वहां बंशीधर ब्रजवासी की राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। पिछले उपचुनाव में उन्होंने अपनी लोकप्रियता के दम पर एक ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उस चुनावी मुकाबले में उन्होंने सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार अभिषेक झा को पराजित किया था। अपनी उसी उपलब्धि और बेबाक छवि के दम पर वे इस बार भी चुनावी अखाड़े में डटे हैं। उनके नामांकन के साथ ही चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है।

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