newspatnaबिहारमौसम

शिवहर में बागमती का रौद्र रूप: खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची नदी, जिले में हाई अलर्ट घोषित

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और बिहार में चक्रवाती तूफान ‘अर्बन’ के कारण हो रही मूसलाधार बारिश ने शिवहर जिले की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार सुबह से ही जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली बागमती नदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए लाल निशान को पार कर गया है, जिससे तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। पानी के उफान और तेज बहाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

डुब्बाघाट पर टूटा इस सीजन का रिकॉर्ड

बागमती नदी के जलस्तर में लगातार और तीव्र वृद्धि दर्ज की जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सोमवार दोपहर तक डुब्बाघाट स्थित गेज पर बागमती खतरे के निशान से पूरे 52 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। यहां नदी का डेंजर लेवल 61.28 मीटर निर्धारित है, जबकि वर्तमान में उफनती धाराएं 61.80 मीटर के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह इस सीजन में बागमती के जलस्तर का अब तक का सबसे उच्चतम रिकॉर्ड है। नदी की तेज लहरें पूरे वेग के साथ तटबंधों से टकरा रही हैं, जिससे तटबंध के भीतर और किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

डीएम ने संभाला मोर्चा, अधिकारी मुस्तैद

नदी के उग्र तेवर और लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों, अंचलाधिकारियों और तमाम प्रशासनिक अमले को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने का सख्त निर्देश दिया है।डीएम प्रतिभा रानी ने बताया, “बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। हम हालात पर लगातार और पैनी नजर बनाए हुए हैं। तटबंधों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।” सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ही कैंप करें।

निचले इलाकों में मुनादी, ग्रामीण कर रहे रतजगा

प्रशासन की ओर से तटबंधों पर लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है। संभावित कटाव स्थलों पर बालू-मिट्टी के बोरों का स्टॉक रखा गया है और बचाव दल को स्टैंडबाय पर रखा गया है। दियारा और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को माइकिंग (मुनादी) के जरिए सतर्क किया जा रहा है और सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।अचानक आए इस उफान ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है, जिन्हें अपनी फसलों के डूबने का अंदेशा सता रहा है। बेलवा और अन्य संवेदनशील गांवों के ग्रामीण अब रात-रात भर जागकर नदी के जलस्तर की निगरानी करने को मजबूर हैं। प्रशासन ने किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए नावों और गोताखोरों की टीम को मुस्तैद कर दिया है।

Related Articles

Back to top button