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जस्टिस वी. कामेश्वर राव बने पटना हाईकोर्ट के 49वें मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

बिहार की न्यायपालिका में नया अध्याय: जस्टिस वी. कामेश्वर राव ने संभाली पटना हाईकोर्ट की कमान

पटना। बिहार की न्यायिक व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जस्टिस वी. कामेश्वर राव ने पटना हाईकोर्ट के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। बिहार लोक भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस राव को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छह अगस्त 2026 को हुई बैठक में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए उनके नाम की अनुशंसा की थी। इससे पूर्व चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय 11 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुई थीं। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद से वरिष्ठ जज जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में हाईकोर्ट का कामकाज देख रहे थे।

बिहार की न्यायपालिका में नया अध्याय

सात अगस्त 1965 को जन्मे जस्टिस वी. कामेश्वर राव का न्यायिक सफर बेहद शानदार रहा है। उन्होंने वर्ष 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातक किया और 1990 में वहीं से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। मार्च 1991 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) सहित विभिन्न न्यायिक मंचों पर करीब दो दशक तक वकालत की। उनके अनुभव को देखते हुए वर्ष 2010 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया।जस्टिस राव को सेवा मामलों, श्रम कानून, संवैधानिक और प्रशासनिक कानून के साथ-साथ मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) से जुड़े मामलों में गहरी विशेषज्ञता हासिल है। 17 अप्रैल 2013 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और इसके बाद 18 मार्च 2015 को वे वहां के स्थायी न्यायाधीश बने।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में ली शपथ

वर्ष 2024 में उनका स्थानांतरण कर्नाटक हाईकोर्ट किया गया था, जहां उन्होंने मई 2025 में कार्यवाहक चीफ जस्टिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद जुलाई 2025 में वे पुनः दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रूप में लौट आए थे। अब पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके अनुभव का लाभ बिहार की न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा।

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