
पटना। बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की आठ महत्वपूर्ण सीटों—जिनमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं—के लिए मतगणना की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी निगरानी के बीच आज सुबह ठीक आठ बजे से आरंभ हो चुकी है। पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में बनाए गए निर्धारित मतगणना केंद्रों पर सुबह से ही भारी गहमागहमी और सियासी हलचल देखने को मिल रही है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के साथ-साथ उनके समर्थकों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। हर किसी की निगाहें अब स्ट्रांग रूम से बाहर आने वाले मतपेटियों और उनसे खुलने वाले सियासी भविष्य के पिटारे पर टिकी हुई हैं।राज्य निर्वाचन आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप, सुबह आठ बजे मतगणना की शुरुआत सबसे पहले मतपत्रों की बंडलिंग (गड्डियां बनाने) के कार्य के साथ की गई। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, एमएलसी चुनाव की मतगणना प्रक्रिया सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तुलना में काफी अलग और जटिल होती है। चूँकि यह चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय पारंपरिक मतपत्रों (बैलेट पेपर) के माध्यम से संपन्न होता है, इसलिए इसमें सामान्य से कहीं अधिक समय लगता है। फिलहाल, सभी केंद्रों पर बंडलिंग का कार्य पूरी सतर्कता और सूक्ष्मता के साथ किया जा रहा है। वरीय अधिकारियों की देखरेख में एक-एक मतपत्र को बारीकी से जांचा जा रहा है ताकि आगे की मुख्य गिनती में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियात्मक त्रुटि की कोई गुंजाइश न बचे।
शाम तक आएंगे शिक्षक सीटों के रुझान
मतगणना की इस धीमी लेकिन सुरक्षित गति को लेकर आम जनता और राजनीतिक खेमे में भारी उत्सुकता है कि आखिर हार-जीत का पहला रुझान कब तक सामने आएगा। इस महत्वपूर्ण विषय पर राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। उनके अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना का कार्य अपेक्षाकृत थोड़ा तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। सब कुछ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चला तो शाम ढलते-ढलते शिक्षक सीटों के शुरुआती रुझान सामने आने लगेंगे। हालांकि, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के अंतिम परिणाम और सटीक रुझानों के लिए उम्मीदवारों को लंबा और धैर्यपूर्ण इंतजार करना पड़ सकता है। अधिकारियों ने बताया कि स्नातक सीटों पर मतदाताओं की संख्या काफी अधिक होती है और मतपत्रों के इस जटिल स्वरूप के चलते एक-एक वोट की वैधता जांचने और उन्हें क्रमबद्ध करने में अतिरिक्त समय लगता है।
बैलेट पेपर से उलझी एमएलसी चुनाव की गिनती
इस बीच, मतगणना की शुचिता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही। मुख्य विपक्षी दलों के कुछ नेताओं द्वारा मतगणना कक्ष के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की पुरजोर मांग उठाई गई थी। इस मुद्दे पर उठ रहे सवालों का बेबाकी से जवाब देते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के पदाधिकारियों ने साफ किया है कि विधान परिषद चुनाव के नियम बिल्कुल पारदर्शी और स्पष्ट हैं। आयोग की नियमावली के तहत मतगणना केंद्र के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने का कोई भी कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है। चुनाव आयोग की तरफ से नियमों का हवाला देते हुए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है।आयोग ने निष्पक्षता को लेकर उठ रही हर शंका को सिरे से खारिज किया है। पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हर एक उम्मीदवार के अधिकृत निर्वाचन अभिकर्ता (एजेंट) मतगणना टेबल के पास मौजूद हैं। उनकी पैनी नजरों के सामने ही वोटों की गिनती की जा रही है। इसके अतिरिक्त, पूरी प्रक्रिया की विधिवत वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। जैसे-जैसे दिन ढलेगा और बंडलिंग के बाद गिनती रफ्तार पकड़ेगी, हार-जीत की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगेगी।



