
एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया CEO नियुक्त किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नियुक्ति को लेकर विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी पर सवाल उठा रहा हैं। बिहार में मुख्य विपक्षी दल आरजेडी की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं।
शिवानंद तिवारी ने अपनी पोस्ट में कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रसीद और पैसों को लेकर कथित गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद पुरानी कमेटी के कुछ सदस्यों ने इस्तीफा दिया, लेकिन तत्कालीन व्यवस्था से जुड़े प्रमुख लोगों से कोई पूछताछ नहीं हुई। उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा का जिक्र करते हुए नई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि अब ट्रस्ट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाया है। तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए अब ऐसे व्यक्ति की जरूरत महसूस की जा रही है, जिन्हें युद्ध का अनुभव है।
‘हंसा जाए या रोया जाए, समझ नहीं आता’
आरजेडी नेता ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या मंदिर के चढ़ावे की व्यवस्था संभालने के लिए सैन्य अनुभव जरूरी है। उनका कहना है कि देश में ईमानदार और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले लोगों की कमी नहीं होनी चाहिए, लेकिन नियुक्ति को देखकर ऐसा लगता है कि मंदिर के चढ़ावे की जिम्मेदारी के लिए भी युद्ध का अनुभव तलाशा जा रहा है।
कांग्रेस ने भी नियुक्ति पर उठाए सवाल
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर बिहार कांग्रेस ने भी बीजेपी पर हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने आरोप लगाया कि बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा अब सनातन धर्मावलंबियों के सामने स्पष्ट हो चुका है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर राजनीति कर सत्ता में पहुंचने वाली बीजेपी के शासन में राम मंदिर के चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं ने करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है।
स्नेहाशीष वर्धन ने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति सवाल उठाने वालों को देशभक्ति के मुद्दे पर घेरने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नियुक्ति पर सवाल उठाता है तो बीजेपी और संघ से जुड़े लोग उस पर ही देशभक्ति को लेकर सवाल खड़े कर सकते हैं।
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सामने आए इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति में राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।



