
बिहार की प्रतिभाएं अब केवल देश में ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी अपनी मेधा और नेतृत्व क्षमता का परचम लहरा रही हैं। पूर्वी चंपारण जिले के सिकरहना अनुमंडल अंतर्गत ढाका प्रखंड के फुलवरिया गांव की रहने वाली स्मृति जायसवाल ने इंग्लैंड में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर पूरे बिहार और चंपारण का मान बढ़ाया है। स्मृति ने इंग्लैंड की प्रतिष्ठित ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में छात्र संघ प्रतिनिधि का चुनाव जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से न केवल उनके पैतृक गांव फुलवरिया, बल्कि पूरे चंपारण और बिहार में हर्ष और गौरव का माहौल है।मिली जानकारी के अनुसार, स्मृति जायसवाल को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट (इंटरनेशनल बिजनेस) एमएससी पाठ्यक्रम का छात्र प्रतिनिधि चुना गया है। इसके साथ ही उन्हें सेंट थॉमस स्ट्रीट की जेसीआर (जूनियर कॉमन रूम) का प्रेसिडेंट होने की भी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी का छात्र संघ वहां के विद्यार्थियों का एक प्रमुख और सशक्त संगठन है, जो सीधे तौर पर छात्रों के हितों, अधिकारों और विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों के लिए काम करता है। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक भारतीय छात्रा द्वारा चुनाव जीतकर नेतृत्व करना, अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।
सिर्फ 30 दिन में लंदन में बजा बिहार का डंका
स्मृति की इस सफलता के पीछे उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कुशाग्र बुद्धि का बड़ा योगदान है। इंग्लैंड जाने से पहले स्मृति ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु से बीबीए (फाइनेंस) की उच्च शिक्षा हासिल की थी। इसके बाद इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट की आगे की पढ़ाई करने के उद्देश्य से वह करीब एक महीने पहले ही इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी गई थीं।सबसे गर्व की बात यह है कि विश्वविद्यालय में अपने शैक्षणिक सफर की शुरुआत के महज एक महीने के भीतर ही उन्होंने वहां के माहौल को समझा, विदेशी छात्रों के बीच अपनी मजबूत पैठ बनाई और छात्र प्रतिनिधि के चुनाव में पूरी मजबूती के साथ हिस्सा लिया। अपने कुशल नेतृत्व और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने भारी समर्थन हासिल कर शानदार जीत दर्ज की।
बेटी का विदेशी धरती पर राज
बता दें कि स्मृति जायसवाल एक राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह बिहार भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह ढाका के पूर्व विधायक पवन जायसवाल और पूर्वी चंपारण जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष प्रियंका जायसवाल की सुपुत्री हैं। माता-पिता दोनों सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर जनसेवा करते रहे हैं, और अब बेटी ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है। सफलता की खबर आते ही उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है।इस सफलता पर उनके पिता व भाजपा नेता पवन जायसवाल ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि, “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना ही नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा के साथ नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने का आत्मविश्वास विकसित करना भी है। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में स्मृति को मिली यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूरे परिवार के लिए गर्व और प्रसन्नता का क्षण है। मुझे विश्वास है कि उनकी यह उपलब्धि बिहार की बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ नेतृत्व के क्षेत्र में भी नई ऊँचाइयाँ हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।”



