
पटना। पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी स्थित पॉक्सो (POCSO) एक्ट की विशेष अदालत ने महिलाओं के खिलाफ हुए एक जघन्य अपराध में ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर सास और पतोहू (बहू) का यौन शोषण करने वाले नामजद अभियुक्त को अदालत ने दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम (कठोर) कारावास की सजा मुकर्रर की है। इसके साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय के इस कड़े फैसले से अपराधियों में एक सख्त संदेश गया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) मिथिलेश कुमार की अदालत ने मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को विस्तार से सुनने तथा साक्ष्यों के गहन अवलोकन के बाद आरोपी को दुष्कर्म की गंभीर धारा 376(2) के तहत दोषी पाया। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि यदि दोषी 20 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) अदा नहीं करता है, तो उसे 15 दिनों की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। इसके अलावा, विचारण (ट्रायल) के दौरान अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई पूर्व अवधि को मुख्य सजा की मियाद में समायोजित किया जाएगा।
न्यायाधीश मिथिलेश कुमार की अदालत ने सुनाया फैसला
सजायाफ्ता अभियुक्त पूर्वी चंपारण जिले के मेहसी थाना क्षेत्र अंतर्गत चकलालू छोटा गांव का निवासी है। उसकी पहचान राजबाबू उर्फ मोतीउर्रहमान के पुत्र निशांत राज उर्फ निशांत रेज़ा के रूप में की गई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषी निशांत ने पीड़ित सास और उसकी पतोहू को नौकरी दिलाने का झूठा झांसा दिया था। महिलाओं की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उसने दोनों के साथ इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। इस शर्मनाक घटना के उजागर होने के बाद स्थानीय समाज में भारी आक्रोश व्याप्त था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। नौकरी के नाम पर हुए इस जघन्य अपराध को लेकर पीड़ित परिवार लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहा था। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद जैसे ही न्यायालय ने सजा का एलान किया, पीड़ित परिवार की आंखों में इंसाफ मिलने की चमक स्पष्ट दिखाई दी। पीड़ित पक्ष ने कहा कि इस फैसले से उन्हें बड़ा संबल मिला है और न्यायपालिका के प्रति उनका भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है। कानूनी जानकारों का भी मानना है कि न्यायालय के ऐसे सख्त फैसलों से महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले असामाजिक तत्वों में कानून का खौफ पैदा होगा।



