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सन ऑफ मल्लाह की हुंकार: आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं, 2027 से पहले दिखाएंगे वोट की ताकत

सन ऑफ मल्लाह की हुंकार: आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं, 2027 से पहले दिखाएंगे वोट की ताकतपटन। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक, बिहार के पूर्व मंत्री और ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से चर्चित मुकेश सहनी ने मंगलवार को रायबरेली में सत्ता पक्ष को खुला अल्टीमेटम दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि 2027 के चुनाव से पहले निषाद समाज को एससी (SC) आरक्षण नहीं दिया गया, तो समाज सत्ता को अपने वोट की ताकत का एहसास करा देगा। उन्होंने अपना स्टैंड साफ करते हुए नारा दिया— “आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं, गठबंधन नहीं तो वोट नहीं।”सोमवार को अमेठी में कार्यक्रम करने के बाद मंगलवार को रायबरेली पहुंचे सहनी का पार्टी कार्यकर्ताओं, युवाओं और निषाद समाज के लोगों ने भव्य स्वागत किया। भारी भीड़ को देखकर गदगद वीआईपी प्रमुख ने कहा कि यह समाज की जागरूकता का बड़ा प्रमाण है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यहां किसी से वोट या चंदा मांगने नहीं आए हैं, बल्कि निषाद समाज को उनके अधिकारों के प्रति जगाने आए हैं।अपने व्यक्तिगत संघर्ष को साझा करते हुए मुकेश सहनी ने बताया कि उनका जन्म एक बेहद गरीब मछुआरा परिवार में हुआ था। दादा और पिता मछली मारकर परिवार का पेट पालते थे। 18 वर्ष की उम्र में रोजी-रोटी की तलाश में वह मुंबई चले गए, जहां मात्र 30 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी से जिंदगी की शुरुआत की। कड़ी मेहनत से उन्होंने कामयाबी का शिखर छुआ, लेकिन जब वापस बिहार लौटे तो अपने समाज को उसी गरीबी, बेरोजगारी और अभाव में सिसकता पाया। इसी पीड़ा ने उन्हें अपना फलता-फूलता कारोबार छोड़कर समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया।’वोट का सौदा नहीं होने देगा समाज’सहनी ने मल्लाह, केवट, कश्यप, बिंद और निषाद समाज को चेताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि समाज अपने बच्चों के भविष्य के लिए खुद लड़े। केवल एक ‘सन ऑफ मल्लाह’ के संघर्ष से मंजिल नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, “अब किसी नेता को अपना वकील बनाकर आंख बंद करके भरोसा करने का वक्त नहीं है। यूपी में निषाद समाज के वोटों को दशकों से पैसे, टिकट और भावनाओं से प्रभावित किया जाता रहा है, लेकिन अब समाज तय करेगा कि उसका वोट किसी भी कीमत पर बिकेगा नहीं।”व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए सहनी ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है, बल्कि उस सिस्टम से है जो निषाद समाज के अधिकारों की फाइल को दबाकर बैठा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मोदी हों या योगी, कोई भी व्यक्ति स्थायी नहीं है। जो कुर्सी पर बैठकर समाज का काम नहीं करेगा, उसे वोट की चोट से जवाब दिया जाएगा।सहनी ने यूपी, बिहार और झारखंड के निषाद समाज को एक मंच पर आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तीनों राज्यों का निषाद समाज एक मुट्ठी की तरह बंधेगा, तब दिल्ली की सत्ता को उनकी असली ताकत का एहसास होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे हर विधानसभा में कमेटियां गठित करें और गांव-गांव जाकर आरक्षण के लिए ‘संकल्प अभियान’ चलाएं। उन्होंने समाज से यह संकल्प लेने की अपील की कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी समाज का कोई राष्ट्रीय नेता नहीं बन पाया है, इसलिए अब वे अपना नेतृत्व स्वयं खड़ा करेंगे।

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