
बिहार की राजधानी पटना की सड़कें गुरुवार को उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं, जब 1,799 पदों पर होने वाली दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा (मेंस) को अचानक रद्द किए जाने के विरोध में हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। करीब 10,789 आक्रोशित अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान से मार्च निकालते हुए जेपी गोलंबर पर प्रशासन द्वारा लगाई गई कड़ी बैरिकेडिंग को ध्वस्त कर दिया और शहर के सबसे व्यस्त डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। सड़क पर लेटकर विरोध जता रहे दर्जनों अभ्यर्थियों को पुलिस ने जबरन उठाकर हिरासत में ले लिया है। इस भारी विरोध प्रदर्शन के कारण राजधानी की यातायात व्यवस्था घंटों तक चरमराई रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह से ही राज्य भर से आए दारोगा अभ्यर्थी गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के पास जुटने लगे थे। धीरे-धीरे यह भीड़ एक विशाल हुजूम में बदल गई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिनके जरिए वे सरकार और पुलिस आयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इन अभ्यर्थियों का मुख्य लक्ष्य लोक सेवक आवास का घेराव कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराना था। जैसे ही इस विशाल मार्च ने जेपी गोलंबर की तरफ कूच किया, प्रशासन हरकत में आ गया। गांधी मैदान से निकले अभ्यर्थियों को रोकने के लिए जेपी गोलंबर पर पहले से ही लोहे की भारी बैरिकेडिंग की गई थी और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था।
आधे घंटे की मशक्कत के बाद टूटी बैरिकेडिंग
प्रदर्शनकारी युवा लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित युवाओं के सामने पुलिस की एक न चली। करीब आधे घंटे की भारी जद्दोजहद और मशक्कत के बाद अभ्यर्थियों के रेले ने पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और डाकबंगला चौराहे की ओर तेजी से बढ़ गए। बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला चौराहे पर पहुंचे अभ्यर्थियों को रोकने के लिए पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। चौराहे पर पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद वहां हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। अपनी मांगों को लेकर अड़े कुछ अभ्यर्थी बीच सड़क पर ही लेट गए। यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिसकर्मियों ने सड़क पर लेटे प्रदर्शनकारियों को जबरन उठाया और पुलिस वैन (वज्र वाहन) में बैठाना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई प्रमुख अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया है।
आधे घंटे की मशक्कत के बाद टूटी बैरिकेडिंग
पूरे डाकबंगला चौराहे को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रदर्शन में शामिल और हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों ने प्रशासन पर ज्यादती का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले एक पूरे महीने से गर्दनीबाग धरना स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे, लेकिन सरकार और संबंधित विभाग ने उनकी कोई सुध नहीं ली। मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरने और लोक सेवक आवास का घेराव करने का यह कड़ा फैसला लेना पड़ा। अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा दर्द और आक्रोश इस बात को लेकर है कि मुख्य परीक्षा आयोजित होने के चार महीने बीत जाने के बाद, अचानक इसे रद्द करने का नोटिस जारी कर दिया गया। एक अभ्यर्थी ने रोष जताते हुए कहा, “परीक्षा होने के चार महीने बाद इसे रद्द करना हमारे साथ सरासर ज्यादती है। इससे हमारी सालों की तैयारी, कड़ी मेहनत और भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है। सरकार हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।” फिलहाल, भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद पटना की सड़कों पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब तक सरकार भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती और परीक्षा रद्द करने का नोटिस वापस नहीं होता, उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।



