बिहार

बिहार में टेंडर डालना हुआ महंगा, ठेकेदारों पर बढ़ेगा खर्च

बिहार सरकार ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी कामों के लिए टेंडर भरने वाले ठेकेदारों को पहले से ज्यादा शुल्क देना होगा। सरकार के इस फैसले का असर राज्य के हजारों छोटे और बड़े ठेकेदारों पर पड़ने वाला है। नए नियम लागू होने के बाद टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने की लागत बढ़ जाएगी, जिससे ठेकेदारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

क्या है नया बदलाव?

सरकार ने ई-टेंडरिंग प्रणाली से जुड़े कुछ शुल्कों में बढ़ोतरी की है। अब सरकारी परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन टेंडर जमा करने वाले ठेकेदारों को अधिक फीस देनी होगी। यह बढ़ी हुई फीस अलग-अलग विभागों और टेंडर की राशि के अनुसार तय की जाएगी।

सरकार का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से ई-टेंडरिंग व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। साथ ही तकनीकी सुविधाओं को मजबूत करने और पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

ठेकेदारों पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों पर पड़ सकता है। पहले जहां कम खर्च में टेंडर भरा जा सकता था, अब उन्हें अतिरिक्त राशि खर्च करनी होगी। कई ठेकेदारों का मानना है कि इससे उनके व्यवसाय की लागत बढ़ जाएगी।

कुछ ठेकेदारों का कहना है कि पहले से ही निर्माण सामग्री, मजदूरी और मशीनों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में टेंडर शुल्क बढ़ने से उन पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

सरकार का क्या कहना है?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं बल्कि टेंडर प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। उनका कहना है कि डिजिटल प्रणाली को मजबूत करने और तकनीकी सेवाओं के रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होती है। इसी कारण शुल्क में संशोधन किया गया है।

सरकार का यह भी दावा है कि नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इससे सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य कंपनियों को काम मिलने की संभावना मजबूत होगी।

ठेकेदारों की मांग

कई ठेकेदार संगठनों ने सरकार से शुल्क बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे ठेकेदारों को राहत दी जानी चाहिए ताकि वे भी सरकारी परियोजनाओं में आसानी से भाग ले सकें। उनका सुझाव है कि टेंडर की राशि के आधार पर शुल्क तय किया जाए और छोटे ठेकों के लिए कम फीस रखी जाए।

आगे क्या होगा?

नई शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद अब सभी सरकारी विभाग इसी नियम के अनुसार टेंडर जारी करेंगे। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बढ़े हुए शुल्क का ठेकेदारों और सरकारी परियोजनाओं पर कितना प्रभाव पड़ता है। फिलहाल इस फैसले को लेकर ठेकेदारों के बीच चर्चा और चिंता दोनों बनी हुई है। सरकार और ठेकेदार संगठनों के बीच इस विषय पर आगे भी बातचीत होने की संभावना है।

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