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ब्रिक्स समिट के बीच विदेशी मेहमानों पर छाया मिथिला का रंग, लोक परंपरा प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में आयोजित ‘मिथिला की लोक परंपरा प्रदर्शनी’ ने ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों का खास ध्यान खींचा। मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में 20 से अधिक देशों के 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मेहमानों ने मिथिला की पारंपरिक कला, लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना और कलाकारों की रचनात्मकता की सराहना की।

20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने देखीं मिथिला की कलाकृतियां

प्रदर्शनी में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, नाइजीरिया, क्यूबा, युगांडा, बेलारूस, थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और बोलिविया सहित कई देशों के प्रतिनिधि पहुंचे।विदेशी मेहमानों ने मिथिला पेंटिंग में इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक रंगों, बारीक रेखांकन और पारंपरिक चित्रांकन शैली को विशेष रूप से पसंद किया। कला की पारंपरिक तकनीक और उसकी विशिष्ट बनावट ने प्रतिनिधियों को काफी प्रभावित किया।

अरिपन और लोकगाथाओं ने खींचा विदेशी मेहमानों का ध्यान

प्रदर्शनी में सिर्फ चित्रकला ही नहीं, बल्कि मिथिला के पर्व-त्योहारों, सामाजिक जीवन और लोक परंपराओं की झलक भी देखने को मिली। अरिपन, रामायण के प्रसंग, कृष्णलीला और राजा सलहेस की लोकगाथा पर आधारित चित्रों ने विदेशी प्रतिनिधियों में खास दिलचस्पी पैदा की।कनीय आचार्य सह प्रदर्शनी क्यूरेटर प्रतीक प्रभाकर ने आगंतुकों को मिथिला चित्रकला की विभिन्न शैलियों, प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल और उनमें छिपे सांस्कृतिक अर्थों की जानकारी दी। चित्रों के जरिए मिथिला की जीवनशैली और लोकविश्वासों को समझने का अवसर प्रतिनिधियों के लिए खास अनुभव रहा।

31 कलाकारों की 64 चुनिंदा कृतियां प्रदर्शित

प्रदर्शनी में कुल 31 कलाकारों की 64 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इनमें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित बौआ देवी, दुलारी देवी और शिवन पासवान की रचनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा कनीय आचार्य संजय कुमार जायसवाल तथा मिथिला चित्रकला संस्थान के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की कलाकृतियों को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया है।मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने विदेशी मेहमानों को संस्थान की विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मिथिला चित्रकला के संरक्षण, संवर्धन और इसके अकादमिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया।

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