
बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं। एनडीए द्वारा अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के बाद अब महागठबंधन ने भी अपने प्रत्याशी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पूर्व विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है।
पार्टी नेतृत्व ने रविवार रात ही सुनील कुमार सिंह को नामांकन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने का निर्देश दे दिया था। इसके बाद शीर्ष नेतृत्व की अंतिम सहमति मिलने पर उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया गया। माना जा रहा है कि उम्मीदवार के चयन पर अंतिम फैसला पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व स्तर पर लिया गया है।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं और फिलहाल दिल्ली में अपनी बड़ी बेटी एवं सांसद मीसा भारती के आवास पर ठहरे हुए हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी दिल्ली में मौजूद हैं और सोमवार को इंडिया गठबंधन की अहम बैठक में भाग लेने वाले हैं।
राजद उम्मीदवार सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। नामांकन की अंतिम तिथि होने के कारण आखिरी समय में सुनील कुमार सिंह के नाम पर मुहर लगी है। इसके बाद उम्मीदवार नामांकन प्रक्रिया की औपचारिकताओं को पूरा करेंगे।
विधान परिषद चुनाव के मौजूदा गणित पर नजर डालें तो राजद के लिए एक सीट लगभग सुरक्षित मानी जा रही है। चुनाव जीतने के लिए करीब 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है और विधानसभा में महागठबंधन के मौजूदा संख्या बल के आधार पर राजद एक सीट आसानी से निकाल सकता है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी, 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी, जबकि 18 जून को मतदान और मतगणना दोनों एक ही दिन संपन्न होंगे।
इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी विधान परिषद चुनाव में अपनी दावेदारी पेश की थी। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने राजद से एक सीट की मांग की थी, लेकिन अब तक इस पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में एनडीए के पास करीब 202 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के अनुसार एनडीए के खाते में आठ सीटें जाती दिख रही हैं, जबकि एक सीट पर राजद की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में अब सभी की निगाहें राजद उम्मीदवार और महागठबंधन की चुनावी रणनीति पर टिकी हुई हैं।



