
मोतिहारी। बिहार के जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों के लिए बड़ी खबर है। पटना हाईकोर्ट ने राज्य के न्यायिक पदाधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की दिशा में ठोस पहल की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पटना हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) ने इस संबंध में सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने 18 अगस्त को हुई अपनी अहम बैठक में न्यायिक सेवा के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र में दो वर्ष की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव पारित किया था। इस निर्णय के आलोक में हाईकोर्ट के महानिबंधक (रजिस्ट्रार जनरल) ने 31 अगस्त को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विधिवत अवगत करा दिया है। पत्र में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस दिशा में शीघ्र आवश्यक प्रशासनिक एवं विधायी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ व अन्य’ मामले में दिए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है। शीर्ष अदालत ने देशभर की जिला अदालतों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की कार्यकुशलता और सेवानिवृत्ति आयु को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए थे।हाईकोर्ट का यह प्रस्ताव राज्य की निचली अदालतों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होने से राज्य को वरिष्ठ एवं अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं का लाभ अतिरिक्त समय तक मिल सकेगा। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे न्यायिक अनुभव और संस्थागत ज्ञान से मुकदमों के त्वरित निष्पादन में तेजी आएगी और न्याय प्रशासन अधिक सुदृढ़ होगा।हाईकोर्ट की सिफारिश के बाद अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है। सामान्य प्रशासन विभाग और विधि विभाग द्वारा संबंधित न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) से मंजूरी मिलते ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।



