
बिहार में औद्योगीकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। जमुई जिले का चकाई प्रखंड जल्द ही एशिया के सबसे बड़े इथेनॉल हब के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाएगा। शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चकाई में 4000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्माणाधीन अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड के इस विशाल इथेनॉल प्लांट का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की डबल इंजन सरकार बिहार के हर कोने में, विशेषकर ग्रामीण और सीमांत इलाकों में उद्योगों का जाल बिछाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।
परियोजना की प्रगति का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ परिवहन मंत्री दामोदर रावत और उद्योग मंत्री श्रेयशी सिंह भी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने प्लांट के निर्माण कार्य की प्रगति का जमीनी स्तर पर जायजा लिया और कंपनी के शीर्ष प्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत जानकारी हासिल की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य को हर हाल में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। निरीक्षण के उपरांत मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस महाप्रोजेक्ट को जमुई समेत पूरे बिहार के लिए एक ‘गेम चेंजर’ करार दिया। उन्होंने कहा, “बिहार में अब तेजी से उद्योगों का जाल बिछ रहा है। जमुई जैसे सीमांत जिले में इतना बड़ा निवेश इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य में औद्योगिक निवेश का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है।” सीएम ने जोर देते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य युवाओं का पलायन रोकना है। 4000 करोड़ की लागत वाले इस प्लांट के शुरू होने से 5000 से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ेगी, जिससे स्थानीय युवाओं को अब काम के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
किसानों के लिए साबित होगा वरदान
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि यह इथेनॉल फैक्ट्री मार्च 2027 तक पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी और यहां विधिवत उत्पादन शुरू हो जाएगा। वहीं, निरीक्षण में मौजूद उद्योग मंत्री श्रेयशी सिंह ने कहा कि जमुई में उद्योगों की स्थापना के लिए अब एक बेहद अनुकूल, पारदर्शी और सुरक्षित माहौल तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार हर उस निवेशक को पूरी मदद और आवश्यक सुविधाएं दे रही है, जो बिहार के विकास में अपना योगदान देना चाहता है।” यह प्लांट केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए भी एक बड़ी क्रांति साबित होगा। इथेनॉल निर्माण के लिए मक्का और टूटे चावल जैसे कच्चे माल की आवश्यकता होगी, जिसकी आपूर्ति स्थानीय किसानों द्वारा की जाएगी। इससे किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य उनके घर के पास ही मिल सकेगा। इस 4000 करोड़ के निवेश से जमुई की अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी, परिवहन व्यवसाय को पंख लगेंगे और चकाई का पूरा इलाका एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। स्थानीय ग्रामीण और युवा इस ऐतिहासिक सौगात से बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं।



