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क्या बिहार में कांग्रेस और आरजेडी की राहें हो रहीं जुदा? शकील अहमद के बयान से हलचल

बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस के अंदर अब अलग-अलग राय खुलकर सामने आने लगी है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद के बयान ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है।

शकील अहमद ने इशारों-इशारों में यह संकेत दिया है कि कांग्रेस बिहार में “एकला चलो” की राह पर चलने का विकल्प तलाश रही है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद पार्टी के भीतर बयानबाजी तेज हो गई।

हालांकि शकील अहमद ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को तारिक अनवर के बयान पर प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ बयान देने से राजनीति नहीं चलती, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना और संगठन के प्रति समर्पण जरूरी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वे लगातार जनता के बीच जाकर संवाद करते रहे हैं, चाहे भीड़ कम रही हो या ज्यादा।

अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर जोर देते हुए शकील अहमद ने कहा कि पार्टी नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी पहले ही पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर चुके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस में “जीरो से हीरो” बनने की ताकत है और पार्टी किसी भी परिस्थिति में खुद को मजबूत कर सकती है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार में भी कांग्रेस गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती है, हालांकि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही है और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।

कुल मिलाकर, ‘एकला चलो’ की चर्चा ने बिहार की सियासत में नए संकेत दे दिए हैं। अगर कांग्रेस इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो इसका असर महागठबंधन की राजनीति पर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी गठबंधन के साथ रहती है या अकेले मैदान में उतरने का फैसला करती है।

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