
पटना। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण में कोटे के भीतर कोटे (उप-वर्गीकरण) को मंजूरी दिए जाने के बाद बिहार एनडीए में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अब केंद्रीय मंत्री व लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान पर सीधा और तीखा हमला बोला है। मांझी ने स्पष्ट शब्दों में चिराग पासवान से इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर दलितों के एक बड़े वंचित वर्ग की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।गयाजी में आयोजित अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि चिराग पासवान गरीबों का वास्तविक हित नहीं चाहते हैं, इसलिए उन्हें अविलंब अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मांझी ने अपने बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन के उस बयान का पुरजोर बचाव किया, जिसमें संतोष ने चिराग के रुख की आलोचना की थी। ‘हम’ संरक्षक ने कहा कि संतोष सुमन ने पार्टी के सैद्धांतिक रुख को ही सामने रखा है। उनके मुताबिक, अगर चिराग की बात मानी गई तो हाशिए पर खड़े लोगों को आरक्षण के लाभ से हमेशा के लिए वंचित होना पड़ेगा।आरक्षण के बंटवारे को बड़े जनहित में अत्यंत आवश्यक बताते हुए मांझी ने बिहार का सटीक उदाहरण दिया। उन्होंने तर्क दिया कि बिहार में अनुसूचित जाति वर्ग की कुल 22 जातियां हैं, लेकिन इनमें से केवल चार जातियों ने ही अब तक आरक्षण का सर्वाधिक लाभ उठाया है। शेष 18 जातियां आज भी मुख्यधारा से पूरी तरह कटी हुई हैं और हाशिए पर जीवन यापन कर रही हैं। मांझी गुट की यह स्पष्ट मांग है कि जिन जातियों की सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति बेहद कमजोर है, उन्हें उनकी आबादी के अनुपात में अलग से आरक्षण मिलना चाहिए, ठीक उसी तर्ज पर जैसे पंजाब में किया गया है।विपक्ष और आलोचकों के सवालों का जवाब देते हुए मांझी ने यह भी साफ किया कि वे किसी भी रूप में आरक्षण व्यवस्था को तोड़ने या खत्म करने की वकालत नहीं कर रहे हैं। उनका संघर्ष केवल इस व्यवस्था के भीतर न्यायसंगत बंटवारे के लिए है, ताकि सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने यह भी बताया कि इस कोटे के भीतर कोटे की मांग को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी पूरी मजबूती के साथ उठा चुके हैं।



