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200 साल पुरानी परंपरा: रामनगर राजदरबार से निकली मां दुर्गा की ऐतिहासिक डोली यात्रा, जयकारों से गूंज उठा पूरा इलाका

बेतिया। आस्था का अनंत सैलाब, सहेज कर रखी गई 200 वर्षों की समृद्ध विरासत और हर जुबां पर गूंजते मां भवानी के जयकारे…। शारदीय नवरात्र की महासप्तमी के पावन अवसर पर पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर में कुछ ऐसा ही अद्भुत व अलौकिक नजारा देखने को मिला। यहां करीब दो सदी पुरानी ऐतिहासिक डोली यात्रा पूरी श्रद्धा, भक्ति और परंपरागत हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। रामनगर राजदरबार से लेकर कोट बंजरिया देवी स्थान तक निकलने वाली इस अनूठी धार्मिक यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। करीब पांच किलोमीटर लंबे इस यात्रा मार्ग पर पग-पग पर भक्त अपनी आराध्य देवी के दर्शनों के लिए पलकें बिछाए खड़े नजर आए। पूरे रास्ते ‘जय माता दी’ और ‘जय मां दुर्गा’ के गगनभेदी जयकारों से समूचा रामनगर और आसपास का इलाका पूरी तरह से भक्तिमय हो उठा।

रामनगर राज परिवार द्वारा शुरू की गई इस डोली यात्रा का न केवल ऐतिहासिक बल्कि अत्यंत गहरा धार्मिक महत्व भी है। पीढ़ियों से अबाध गति से चली आ रही यह यात्रा राजपरिवार की अटूट धार्मिक आस्था, स्थानीय लोगों के दृढ़ लोकविश्वास और शक्ति की उपासना के महापर्व नवरात्र के उत्साह को एक ही सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। समय का पहिया घूमा, दौर बदला और कई पीढ़ियां भी बदल गईं, लेकिन इस ऐतिहासिक परंपरा के प्रति आम जनमानस की श्रद्धा और समर्पण के भाव आज भी ज्यों के त्यों बरकरार हैं। इस विशिष्ट परंपरा की विधिवत शुरुआत शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि से ही हो जाती है। प्राचीन मान्यताओं और राजसी परंपरा के अनुसार, रामनगर राजपरिवार के कुलगुरु व पुरोहित कोट बंजरिया स्थित अति प्राचीन और प्रसिद्ध देवी स्थान पर पहुंचते हैं। वहां वे पूरे विधि-विधान के साथ माता रानी को राजदरबार में पधारने का पारंपरिक निमंत्रण देते हैं। यह विशेष रस्म सदियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा का सबसे अहम और पवित्र हिस्सा मानी जाती है।इसके पश्चात महासप्तमी की सुबह एक तय शुभ मुहूर्त में पारंपरिक परिधानों में सजे कहारों के कंधों पर सुसज्जित डोली को कोट बंजरिया देवी स्थान की ओर ले जाया जाता है। वहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

राजपरंपरा और लोकआस्था का अद्भुत संगम

धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए, पवित्र बेल वृक्ष के फल (बेल) को मां दुर्गा के साक्षात स्वरूप के रूप में पूर्ण आदर-सत्कार के साथ डोली में विराजमान कर रामनगर राजदरबार स्थित मंदिर लाया जाता है। राजदरबार में पहुंचने के बाद माता की महाआरती और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होती है। कोट बंजरिया देवी स्थान से रामनगर राजदरबार तक निकलने वाली इस पावन डोली यात्रा के दर्शनों के लिए अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही शुरू हो गई थी। इसमें केवल रामनगर शहर के ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से भी लोग पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। डोली के गुजरने के दौरान सड़क के दोनों किनारों पर कतारबद्ध खड़े श्रद्धालु शीश नवाकर दर्शन करते और पुष्प वर्षा करते नजर आए। श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का एक बड़ा अवसर भी है। रामनगर की यह ऐतिहासिक डोली यात्रा अपनी इन विशिष्ट रस्मों और मान्यताओं के कारण समूचे इलाके में अपनी एक अलग पहचान रखती है। यह भव्य आयोजन स्थानीय समाज में सामूहिक सहभागिता का जीता-जागता प्रतीक है। इस यात्रा के जरिए न केवल सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का सफल निर्वहन किया जाता है, बल्कि नई युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों और विरासत से रूबरू होने का अवसर मिलता है। बदलते दौर में भी लोकआस्था की इतनी गहरी जड़ें इस बात की गवाह हैं कि रामनगर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान आज भी पूरी तरह से जीवंत है।

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