
बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब महज हार-जीत का सामान्य आंकड़ा नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और समूचे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए प्रतिष्ठा की सबसे बड़ी लड़ाई बन चुका है। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की खुली बगावत और जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की आक्रामक बयानबाजी ने इस चुनाव को सूबे की सियासत का सबसे गर्म मुद्दा बना दिया है। जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने के लिए एनडीए ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के रणनीतिक कौशल और उनके उभरते राजनीतिक नेतृत्व की अग्निपरीक्षा है।
एनडीए का शंखनाद और निशांत कुमार के हाथों में कमान
आगामी 13 अक्टूबर से एनडीए के तमाम बड़े नेता चुनावी मैदान में उतरकर प्रचार अभियान का शंखनाद करने जा रहे हैं। बिहारशरीफ और नवादा में एनडीए नेताओं की बड़ी रैलियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इस पूरे सघन प्रचार अभियान की कमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के कंधों पर है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो नीरज कुमार के समर्थन में निशांत कुमार की यह अति-सक्रियता महज एक चुनावी औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके जरिए मोकामा विधायक अनंत सिंह को एक सख्त और सीधा राजनीतिक संदेश देने की पुख्ता तैयारी है। मिशन 2026 (आगामी विधानसभा चुनाव) के मद्देनजर भी एनडीए इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ का हर हाल में प्रदर्शन करना चाहता है।
अनंत सिंह की बगावत से उलझे समीकरण, बढ़ी जदयू की धड़कनें
पटना स्नातक क्षेत्र में जदयू के लिए सबसे बड़ी और सीधी चुनौती पार्टी के भीतर से ही उभर रही है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी लाइन को सिरे से दरकिनार करते हुए नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। अनंत सिंह ने अपना पूरा समर्थन जनसुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह को दे दिया है। उनके इस बागी कदम से न केवल एनडीए के भीतर एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि पटना, नालंदा और नवादा तक के सियासी समीकरण भी उलझ गए हैं। जदयू के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल वोटिंग तक खामोश है, लेकिन चुनाव के नतीजे आते ही अनंत सिंह पर बड़ी अनुशासनात्मक गाज गिर सकती है।
प्रशांत किशोर की चुनौती और नीरज कुमार का करारा पलटवार
इस त्रिकोणीय और दिलचस्प मुकाबले में जुबानी तीर भी जमकर चल रहे हैं। जनसुराज के प्रशांत किशोर ने हाल ही में चुनौती दी थी कि यदि नीरज कुमार को वाकई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन हासिल है, तो वह उनका एक वीडियो जारी करके दिखाएं। इस सियासी तंज पर नीरज कुमार ने भी करारा पलटवार किया है। नीरज ने मुख्यमंत्री के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का हवाला देते हुए दो टूक कहा, “हम उस दौर से नीतीश जी के साथ साये की तरह रहे हैं, जब वह रिक्शे पर चला करते थे। प्रशांत किशोर जैसे लोगों की बातों से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। जिस व्यक्ति को क्लाइमेट लीडर बनाया गया, उसे ऐसी सतही बातें नहीं करनी चाहिए।” नीरज ने स्पष्ट किया कि उन्हें नीतीश कुमार का पूरा आशीर्वाद प्राप्त है और इसके लिए किसी वीडियो प्रमाण की बिल्कुल भी दरकार नहीं है। पटना स्नातक क्षेत्र का यह महामुकाबला अब कई पैमानों पर कसा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 13 अक्टूबर से शुरू हो रहा एनडीए का यह संयुक्त अभियान स्नातक मतदाताओं पर कितना गहरा असर डालता है। अगर एनडीए प्रत्याशी नीरज कुमार यह सीट आसानी से निकाल लेते हैं, तो यह बागी अनंत सिंह के लिए करारा झटका होगा और निशांत कुमार की नेतृत्व क्षमता पर मुहर लगेगी। इसके विपरीत नतीजे आने पर जदयू के भीतर खलबली मच सकती है। कुल मिलाकर, यह चुनाव नीतीश कुमार की विरासत और पार्टी अनुशासन का सबसे बड़ा ‘लिटमस टेस्ट’ बन गया है।



