
पटना। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर बिहार की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक नगरी बोधगया पहुंचे। यहां उन्होंने सपरिवार फल्गू की सहायक निरंजना नदी के पवित्र तट पर अपने पूर्वजों की शांति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ तर्पण किया। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध बोधगया मठ में भी पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। अपने इस आध्यात्मिक दौरे के दौरान उनका कड़ा राजनीतिक तेवर भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने और आत्ममंथन करने की कड़ी नसीहत दी।
निरंजना नदी में किया तर्पण, मठ में टेका मत्था
गया जी और बोधगया को सनातन धर्म में मोक्ष की भूमि कहा जाता है। इसी अपार आस्था के तहत मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव सपरिवार यहां पहुंचे थे। बोधगया मठ पहुंचने पर वहां के पुजारियों, संतों और स्थानीय प्रशासन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निरंजना नदी के पावन जल से अपने पितरों का तर्पण किया। हिंदू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति और पिंडदान के लिए इस स्थान का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ और कर्मकांड संपन्न करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पवित्र धरती पर आकर उन्हें असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई है।
चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस के दोहरे मापदंड पर तंज
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने देश के राजनीतिक हालात पर खुलकर बात की और विपक्ष के वर्तमान रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कांग्रेस और विशेषकर राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की एक बेहद महत्वपूर्ण और रचनात्मक भूमिका होती है, लेकिन दुर्भाग्य से वर्तमान विपक्ष इस जिम्मेदारी को भूल गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “विपक्ष को चाहिए कि वह अपनी वास्तविक भूमिका अदा करे। उन्हें इस बात का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए कि देश की जनता ने उन्हें लगातार सत्ता से दूर क्यों रखा है। इसके बजाय राहुल गांधी और उनके साथ के लोग केवल देश में अराजकता और भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं, जो किसी भी नजरिए से उचित नहीं है।” कांग्रेस की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए सीएम यादव ने उनके दोहरे मापदंड को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो कांग्रेस पार्टी और उसके नेता संवैधानिक संस्थाओं, विशेषकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाते हैं और उसका कड़ा विरोध करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, जब किसी राज्य (जैसे केरल या अन्य जगह) में उनकी या उनके गठबंधन की सरकार बनती है, तो वे सत्ता का सुख भोगते हैं और वहां चुनाव आयोग ठीक हो जाता है। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें चुनाव आयोग पर इतना ही अविश्वास है, तो जहां उनकी सरकारें बनती हैं, वहां से उन्हें इस्तीफा दिला देना चाहिए।



