
पटना। बिहार में बाढ़ की विभीषिका के बीच अफसरशाही और सरकारी तंत्र की सुस्ती से अब सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों का सब्र भी जवाब देने लगा है। पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित लौरिया विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बाढ़ पीड़ितों को उचित मुआवजा और राहत सामग्री नहीं मिलने से क्षुब्ध विधायक ने मंगलवार से कलेक्ट्रेट के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का एलान कर दिया है।गंडक नदी के रौद्र रूप और लगातार हो रहे कटाव के कारण योगापट्टी प्रखंड की एक दर्जन पंचायतों के करीब 30 गांव इस वक्त बुरी तरह प्रभावित हैं। जमीनी हालात इतने भयावह हैं कि सिसवा और मंगलपुर गांव में 50 से अधिक घर गंडक नदी की तेज धारा में विलीन हो चुके हैं। सैकड़ों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं। विधायक विनय बिहारी का सीधा आरोप है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। भारी तबाही के बाद भी प्रशासन इस पूरे इलाके को आधिकारिक तौर पर बाढ़ प्रभावित मानने को ही तैयार नहीं है। अब तक सरकारी सहायता के नाम पर पीड़ितों को महज कुछ पॉलिथीन शीट ही बांटी गई हैं, जो इस त्रासदी में ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं
विधायक ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे जनता की समस्या को लेकर चुप नहीं बैठे हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को उनका हक और उचित मुआवजा दिलाने के लिए वे सरकार के स्तर पर हर संभव प्रयास कर चुके हैं। वे राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से चार बार मुलाकात कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री को भी दो बार स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया गया है। आला अधिकारियों से लेकर विभागीय मंत्रियों तक गुहार लगाने के बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है।विनय बिहारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि वे एक बार फिर जिलाधिकारी (डीएम) से इस पूरे प्रकरण पर निर्णायक वार्ता करेंगे। यदि इस बातचीत के बाद भी योगापट्टी और अन्य प्रभावित क्षेत्रों को बाढ़ प्रभावित घोषित कर लोगों को राहत पहुंचाने की दिशा में त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो वे मंगलवार को बेतिया कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे।
कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
सत्ता पक्ष के विधायक का अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर होना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटनाक्रम से विपक्ष को भी बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। अब यह देखना होगा कि विधायक के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन हरकत में आता है, या फिर कलेक्ट्रेट परिसर सत्ता पक्ष के विधायक के धरनास्थल में तब्दील हो जाएगा। बहरहाल, कटाव का दंश झेल रहे पीड़ितों की आंखें अब भी सरकारी मदद की बाट जोह रही हैं।



