
पटना। बिहार की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, तकनीकी और रोजगारपरक बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा लगातार ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। यह बातें हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य राज्य के युवाओं को बिहार में ही बेहतर अवसर प्रदान करना है, ताकि उन्हें शिक्षा और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में न भटकना पड़े। मंत्री डॉ. सुमन ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के आधुनिकीकरण की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की दिशा में योजना तैयार करने का निर्देश एक स्वागतयोग्य और दूरदर्शी कदम है। आज के डिजिटल युग में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण का विस्तार बिहार के विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह से तैयार करेगा।
सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा होगी अनिवार्य
शिक्षा और रोजगार को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए डॉ. सुमन ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में बिहार में 32,388 विद्यालय अध्यापकों की नियुक्ति के लिए TRE-4.0 की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसमें प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के पद शामिल किए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की बहाली न केवल शिक्षा के बुनियादी स्तर को सुधारेगी, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के लिए रोजगार का एक बहुत बड़ा और सुनहरा अवसर भी साबित होगी। छात्रों के पलायन के गंभीर मुद्दे पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए बिहार में निजी विश्वविद्यालयों को भी लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की इस सकारात्मक पहल से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की मजबूरी काफी हद तक कम होगी। बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों के स्थापित होने से न सिर्फ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी भारी बल मिलेगा।
आत्मनिर्भर बिहार की रखी जा रही मजबूत नींव
डॉ. सुमन ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को अवसरों की तलाश में बिहार से बाहर जाने के बजाय, उन्हें अपने ही गृह राज्य में बेहतर शिक्षा और रोजगार का शानदार वातावरण मिले, यही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा के क्षेत्र में किया जा रहा यह निवेश केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं है, बल्कि यह एक विकसित और ‘आत्मनिर्भर बिहार’ की नींव को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निवेश है। यदि सरकार, शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार करें, तो बिहार के युवा निश्चित रूप से देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकते हैं।



