
पटना। बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अनूठी पहल की। वे राजधानी के एक सरकारी विद्यालय में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पेरेंट्स-टीचर मीटिंग – पीटीएम) में अचानक पहुंच गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं, उपलब्धियों और चुनौतियों की विस्तार से जानकारी ली।मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसर में कदम रखते ही सबसे पहले पीटीएम की चल रही गतिविधियों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने ध्यान से सुना कि शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बच्चों की प्रगति को लेकर किस प्रकार की चर्चाएं हो रही हैं। सीएम ने बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों की चिंताओं को समझा और उनके बहुमूल्य सुझावों पर भी गौर किया। इसके पश्चात, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं के बीच जाकर उनसे पढ़ाई, आगामी परीक्षाओं की तैयारी और स्कूल के समग्र वातावरण को लेकर कई रोचक सवाल पूछे।
छात्रा को किया प्रेरित: 300 में से 280-290 अंक लाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री का यह औचक निरीक्षण उस वक्त बेहद खास और आत्मीय नजर आया, जब वे पूरे सादगी के साथ महिला प्रिंसिपल के ठीक बगल में कुर्सी पर बैठ गए और सामने बैठे छात्र-छात्राओं से घुल-मिलकर बातचीत करने लगे। सीएम ने बच्चों से उनकी दैनिक पढ़ाई और पिछली परीक्षाओं में किए गए प्रदर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह गहराई से समझने का प्रयास किया कि विद्यालय में पठन-पाठन की क्या शैली अपनाई जा रही है और अध्ययन के दौरान बच्चों को किन वास्तविक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संवाद के दौरान एक बेहद दिलचस्प वाकया तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ने एक होनहार छात्रा से उसकी पिछली परीक्षा के परिणामों के विषय में पूछा। सीएम ने अत्यंत सहजता से सवाल किया कि इस बार परीक्षा में उसे कितने अंक प्राप्त हुए हैं। छात्रा द्वारा अपने प्राप्तांक बताए जाने के बाद, मुख्यमंत्री ने उसका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने उसे भविष्य में और अधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि मेहनत इस स्तर की होनी चाहिए कि 300 अंकों की परीक्षा में आसानी से 280 से 290 अंक तक हासिल किए जा सकें।
अभिभावकों से मांगे व्यवस्था सुधार के सुझाव
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यालय के शिक्षकों के साथ भी एक गंभीर बैठक की और बच्चों के परीक्षा परिणामों को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्कूल में अध्ययनरत प्रत्येक बच्चे के शैक्षणिक प्रदर्शन पर निरंतर और पैनी नजर रखनी होगी। यह विश्लेषण करना नितांत आवश्यक है कि किस छात्र को कितने अंक मिल रहे हैं और किन विशिष्ट विषयों में उसे अधिक कठिनाई हो रही है। सीएम ने जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास होना चाहिए कि विद्यालय के प्रत्येक छात्र को परीक्षाओं में कम से कम 50 प्रतिशत अंक अवश्य प्राप्त हों। यदि किसी बच्चे के अंक इस निर्धारित मापदंड से कम आ रहे हैं, तो शिक्षकों को केवल उसके परिणाम को देखकर रुक नहीं जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे के मूल कारणों की गहराई से तलाश करनी चाहिए। इसके लिए पढ़ाने की पारंपरिक विधियों में बदलाव, कमजोर विषयों पर अतिरिक्त ध्यान और बच्चों की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार नए और आधुनिक तरीके अपनाने की महती आवश्यकता है। अपने इस दौरे के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने पीटीएम में उपस्थित अभिभावकों से भी खुली बातचीत की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में निरंतर सुधार लाने के उद्देश्य से उनकी स्पष्ट राय जानी। सीएम ने अभिभावकों से संवाद के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले उनके बच्चों के सामने किस तरह की व्यावहारिक समस्याएं आती हैं और वर्तमान व्यवस्था में किन सकारात्मक बदलावों की तत्काल आवश्यकता महसूस होती है। मुख्यमंत्री के इस जमीनी जुड़ाव और शिक्षा के प्रति उनकी गंभीरता की उपस्थित सभी लोगों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।



