
समान नागरिक संहिता (UCC) के बाद अब चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के मुद्दे पर भी NDA के कुछ सहयोगी दलों की राय बीजेपी से अलग नजर आ रही है। हालांकि, अलग-अलग नेताओं के बयान अपने-अपने तरीके से सामने आए हैं और गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं है।
ताजा मामला चुनाव आयोग से जुड़ा है। केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा है कि NDA सरकार में शामिल होने के बावजूद वह किसी संस्था का बचाव करने के लिए बयान नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि चुनाव आयोग को लेकर आम लोगों के मन में कोई संदेह पैदा हो रहा है, तो उसे दूर किया जाना चाहिए।
चिराग बोले- जनता का संदेह दूर होना जरूरी
चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष क्या कह रहा है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन यदि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच सवाल या भ्रम की स्थिति बनती है, तो आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।बिहार विधानसभा में LJP (रामविलास) के 19 विधायक हैं, जबकि लोकसभा में पार्टी के पांच सांसद हैं। केंद्र और राज्य सरकार में भी पार्टी की भागीदारी है।राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे शब्दों से असहमति जताई। हालांकि, उन्होंने SIR को लेकर पैदा हुई उलझन पर आयोग से स्पष्टीकरण की जरूरत बताई।उनका कहना है कि विवाद के कारण जनता के बीच यदि किसी तरह की भ्रम की स्थिति बनी है, तो चुनाव आयोग को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
इस पूरे मामले में NDA के भीतर जनता दल यूनाइटेड का रुख बीजेपी के समर्थन में रहा है। केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अपनी चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रही है।ललन सिंह के मुताबिक, कांग्रेस की हार के पीछे नेतृत्व से जुड़ी कमजोरी जिम्मेदार है, न कि चुनाव आयोग।
UCC को लेकर भी जेडीयू, LJP (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने तत्काल समर्थन या विरोध के बजाय पहले प्रस्तावित कानून के प्रारूप को देखने की बात कही थी।गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 तक NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात कहे जाने के बाद इन दलों के नेताओं ने कहा था कि प्रारूप सामने आने के बाद ही वे अपना रुख स्पष्ट करेंगे।चिराग पासवान ने उस समय देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा था कि सभी समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए व्यापक चर्चा के बाद ही पार्टी अपना मत रखेगी।अनुसूचित जाति के आरक्षण के भीतर आरक्षण के मुद्दे पर भी NDA के कुछ नेताओं के विचार अलग रहे हैं। चिराग पासवान मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ अपना रुख जाहिर करते रहे हैं।
दूसरी ओर, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी अनुसूचित जातियों के आरक्षण के भीतर अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं और हरियाणा की व्यवस्था का उदाहरण देते हैं।NDA के भीतर सहयोगी दलों के नेताओं का किसी मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगना गठबंधन राजनीति में अलग-अलग विचारों को दर्शाता है। चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की ओर से चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग सामने आई है, जबकि जेडीयू ने आयोग के खिलाफ विपक्ष के आरोपों का विरोध किया है।
इस बीच, विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगाए जा रहे आरोपों और NDA नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच SIR का मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है।



