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जेल में युवक की मौत पर गरमाई सियासत, तेजस्वी ने की परिजनों से मुलाकात; राज्य सरकार पर बोला चौतरफा हमला

पटना। बिहार में पुलिस हिरासत (कस्टोडियल डेथ) में एक युवक की संदिग्ध मौत के बाद सूबे का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मृतक युवक के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए मृतक की पत्नी को तत्काल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए तेजस्वी ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सरकार से मृतक के आश्रित को अविलंब सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही, घटना के लिए सीधे तौर पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए जेल अधीक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग रखी।संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजद नेता ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस बेगुनाह लोगों को झूठे मुकदमों में फंसा रही है और जेल के भीतर ही उनकी हत्या की जा रही है। हालिया घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उत्पाद विभाग (एक्साइज पुलिस) ने युवक को बेवजह पकड़ा था। उसे छोड़ने की एवज में पुलिस द्वारा एक लाख रुपये की मोटी रिश्वत मांगी गई थी। जब परिवार यह रकम चुकाने में असमर्थ रहा, तो उसे झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेज दिया गया, जहां साजिशन जहर देकर उसे मार दिया गया।

राज्य सरकार पर बोला चौतरफा हमला

पुलिस हिरासत में मौतों के मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने अजय मांझी, रोशन यादव, राकेश कुमार, गुफरान आलम, तस्कीन अंसारी और जगबीर राय का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में सबसे ज्यादा मौतें अब पुलिस कस्टडी में हो रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के संसद में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कस्टोडियल डेथ के मामलों में बिहार आज देश में पहले पायदान पर है। महज 75 दिनों के भीतर पुलिस हिरासत में 19 लोगों की जान जा चुकी है।वहीं, जमुई में नाबालिग लड़की से छेड़खानी और विरोध करने पर छात्र की पिटाई के मामले पर तेजस्वी ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने सम्राट चौधरी के उस बयान पर तंज कसा जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘रात में निकलिए, कुछ नहीं होगा।’ तेजस्वी ने चुनौती दी कि यदि सम्राट चौधरी अपनी जुबान के पक्के हैं, तो जमुई की इस वीभत्स घटना के बाद उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। घटना में शामिल आठ में से केवल एक आरोपी पर कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए उन्होंने सभी दोषियों को जात-पात से ऊपर उठकर फांसी की सजा देने की मांग की।

जेल में मौत पर तेजस्वी का महा-विस्फोट

जदयू सांसद ललन सिंह, मंत्री श्रवण कुमार, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और श्रेयसी सिंह पर तीखा प्रहार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि सत्ता पक्ष के नेता ऐसी घटनाओं को ‘छिटपुट’ बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। यदि इन नेताओं के परिवार की बच्चियों के साथ ऐसा होता, तो क्या तब भी वे इसे महज एक ‘छिटपुट’ घटना मानते? ऐसी बयानबाजी करने वाले नेताओं को माफी मांगनी चाहिए।राज्य की कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि बिहार में आज छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में ‘चंदा दो और मनचाहा ट्रांसफर पाओ’ का खुला खेल चल रहा है, जहां भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है। अंत में जीतन राम मांझी पर भी प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि मांझी जी को अब बिहार से कोई मतलब नहीं है; उन्हें बंगला, सुरक्षा और बेटे को मंत्री पद मिल गया है, इसलिए वे अब निश्चिंत हैं।

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