
बिजली के बढ़ते बिल से परेशान लोगों के बीच घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत लोगों को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है। इसी वजह से कई परिवार अपनी बिजली की खपत के हिसाब से 1 किलोवाट, 3 किलोवाट या 5 किलोवाट का सिस्टम लगवाने पर विचार कर रहे हैं।लेकिन सोलर पैनल लगवाने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि सब्सिडी मिलने के बाद अपनी जेब से कितना पैसा लगाना पड़ेगा और बिजली बिल में होने वाली बचत से यह रकम कितने समय में वापस आ जाएगी?
सोलर सिस्टम को एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। आम तौर पर सोलर पैनल की लाइफ करीब 25 से 30 साल तक मानी जाती है। ऐसे में शुरुआती निवेश के बाद लंबे समय तक बिजली बिल में बचत मिल सकती है।
सब्सिडी के बावजूद शुरुआत में देना पड़ सकता है पैसा
यह समझना जरूरी है कि सोलर सिस्टम लगवाते समय सरकार की सब्सिडी मिलने तक आपको इंतजार करना पड़ सकता है। यानी ऐसा नहीं है कि शुरुआत से ही पूरी लागत सब्सिडी से निकल जाएगी।इंस्टॉलेशन के समय पहले आपको सिस्टम की लागत का एक हिस्सा अपनी जेब से देना पड़ सकता है। यह रकम प्रोजेक्ट की कुल लागत और मिलने वाली सब्सिडी के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।सिस्टम इंस्टॉल होने और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी आपके खाते में आती है। इसलिए सोलर लगवाने का फैसला करते समय सिर्फ सब्सिडी नहीं, बल्कि शुरुआती भुगतान और बाद में होने वाली मासिक बचत दोनों का हिसाब रखना जरूरी है।
सोलर लगते ही शुरू हो जाती है बचत
सोलर पैनल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सिस्टम चालू होते ही बिजली के खर्च में कमी आनी शुरू हो जाती है। आपकी बिजली खपत, सिस्टम की क्षमता, धूप और स्थानीय बिजली दर के आधार पर बचत की रकम अलग-अलग हो सकती है।यानी लागत की रिकवरी दो स्तर पर होती है—पहला, सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के जरिए और दूसरा, हर महीने बिजली बिल में होने वाली बचत से।अब अलग-अलग क्षमता के सिस्टम का उदाहरण समझिए।
1 किलोवाट सोलर सिस्टम: करीब 2 साल में लागत की भरपाई
अगर आपके घर की बिजली खपत करीब 150 यूनिट प्रति माह है तो 1 किलोवाट का सोलर सिस्टम आपके लिए पर्याप्त हो सकता है।इस सिस्टम को लगवाने की अनुमानित लागत करीब 55 हजार रुपये बताई गई है। इसमें करीब 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद आपकी प्रभावी लागत लगभग 25 हजार रुपये रह जाती है।अगर बिजली बिल में हर महीने करीब 1,000 रुपये की बचत होती है, तो 25 हजार रुपये की रकम करीब 25 महीने में यानी लगभग 2 साल में वापस निकल सकती है।
इसके बाद सोलर सिस्टम से होने वाली बिजली बचत आपके लिए अतिरिक्त फायदा बन सकती है।जिन घरों में बिजली की खपत ज्यादा है, वहां 3 किलोवाट का सिस्टम विकल्प हो सकता है। दावा है कि यह सिस्टम पर्याप्त धूप मिलने पर महीने में करीब 400 यूनिट तक बिजली पैदा कर सकता है।इसकी अनुमानित लागत में करीब 78 हजार रुपये की सब्सिडी घटाने के बाद उपभोक्ता पर लगभग 82 हजार रुपये का खर्च रह जाता है।अगर इस सिस्टम से बिजली बिल में करीब 2,500 रुपये प्रति माह की बचत होती है, तो शुरुआती खर्च की भरपाई लगभग 33 महीने, यानी करीब 3 साल में हो सकती है।
5 किलोवाट सिस्टम: ज्यादा निवेश, लेकिन ज्यादा बिजली बचत
अगर घर की बिजली खपत काफी ज्यादा है तो 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया जा सकता है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक यह सिस्टम रोजाना करीब 22 यूनिट तक बिजली पैदा कर सकता है, हालांकि वास्तविक उत्पादन मौसम और धूप पर निर्भर करेगा।इस सिस्टम की अनुमानित लागत करीब 2.5 लाख रुपये है। इसमें 78 हजार रुपये की सब्सिडी घटाने के बाद करीब 1.82 लाख रुपये का खर्च उपभोक्ता को उठाना पड़ सकता है।
अगर हर महीने बिजली बिल में लगभग 4,500 रुपये की बचत होती है, तो 1.82 लाख रुपये की लागत करीब 40 महीने, यानी लगभग सवा तीन साल में निकल सकती है।सोलर सिस्टम लगवाने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपके घर में औसतन कितनी बिजली खर्च होती है। जरूरत से छोटा सिस्टम लगाने पर अपेक्षित बचत नहीं मिलेगी, जबकि जरूरत से बहुत बड़ा सिस्टम लगाने पर शुरुआती निवेश बढ़ सकता है।



