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खाद माफियाओं और कृषि अधिकारियों के गठजोड़ पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, मोतिहारी के बड़े कारोबारी पर एफआईआर

मोतिहारी। जिले में खाद की कालाबाजारी और कृषि अधिकारियों के साथ माफियाओं की कथित मिलीभगत के खिलाफ प्रशासनिक चाबुक जमकर चला है। सदर एसडीओ अरुण कुमार और एसडीपीओ (डीएसपी) दिलीप सिंह की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने भ्रष्टाचार रूपी गंगोत्री में डुबकी लगा रहे सिस्टम को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।इसी कड़ी में शहर के एक बड़े खाद कारोबारी ‘तरुण खाद बीज भंडार’ के संचालक तापस कर्मकार के खिलाफ बंजरिया थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर जिले में खाद माफियाओं के खिलाफ यह चौथी सबसे बड़ी कार्रवाई है, जिसने जिला कृषि विभाग की कार्यशैली और उसकी लचर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी कड़ी में शहर के एक बड़े खाद कारोबारी ‘तरुण खाद बीज भंडार’ के संचालक तापस कर्मकार के खिलाफ बंजरिया थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर जिले में खाद माफियाओं के खिलाफ यह चौथी सबसे बड़ी कार्रवाई है, जिसने जिला कृषि विभाग की कार्यशैली और उसकी लचर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन दिन चली मैराथन जांच, वीडियो कैमरे में कैद हुई धांधली

सदर एसडीओ के कड़े निर्देश पर मजिस्ट्रेट और अनुमंडल कृषि पदाधिकारी की मौजूदगी में तरुण खाद बीज भंडार के ठिकानों पर छापेमारी की गई। कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए वीडियोग्राफी के बीच लगातार तीन दिनों तक गोदामों की सघन जांच, उर्वरकों की गिनती और दस्तावेजों का मिलान किया गया। जांच टीम उस वक्त हैरान रह गई जब कारोबारी के लाइसेंस में केवल दो गोदामों का जिक्र मिला, जबकि मौके पर तीन अलग-अलग ठिकानों पर खाद का भारी स्टॉक डंप पाया गया। बिना लाइसेंस वाले तीसरे गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक का स्टॉक कैसे पहुंचा, यह एक बड़ा सवाल है। जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कारोबारी तापस कर्मकार को आधिकारिक रूप से केवल बीवीएफसीएल (BVFCL), मैट्रिक्स (Matrix) और हर्ल (HURL) जैसी उर्वरक कंपनियों का माल बेचने का लाइसेंस मिला हुआ था। लेकिन, जब टीम ने गोदामों को खंगाला तो वहां इफको (IFFCO), आईपीएल (IPL) और पीपीएल (PPL) समेत करीब एक दर्जन अन्य नामी कंपनियों के हजारों बैग खाद बरामद हुए। इसके अलावा, कारोबारी द्वारा जांच टीम को न तो कोई स्टॉक पंजी (रजिस्टर) दिखाई गई और न ही बिक्री का कोई ब्योरा उपलब्ध कराया गया। इसी आधार पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने केस दर्ज कराया है।

सील गोदाम से गायब हो चुकी है 700 बोरी खाद

मोतिहारी में पिछले 10 दिनों में हुई कार्रवाइयों ने पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इससे पहले प्रशासन की रेड में कहीं सील किए गए गोदाम से 700 बोरी खाद रातों-रात गायब मिली, तो कहीं एक साल से एक्सपायर हो चुके लाइसेंस पर हजारों बोरी का अवैध खेल चलता पाया गया। कुछ मामलों में तो लाइसेंस वाले स्थान से 5 किलोमीटर दूर अवैध तरीके से गोदाम संचालित किए जा रहे थे। प्रशासन की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल जिला कृषि कार्यालय पर उठ रहा है। अगर एसडीओ और एसडीपीओ ने यह मोर्चा नहीं संभाला होता, तो क्या कृषि अधिकारी यूं ही आंख मूंदकर सोते रहते? फिलहाल, बंजरिया थाने में केस दर्ज होने के बाद अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस सिंडिकेट में शामिल लापरवाह विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उन पर भी गाज गिरेगी, या कार्रवाई सिर्फ कारोबारी तक ही सिमट कर रह जाएगी।

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