newspatnarajnitiबिहार

बिहार में कुदरत का कहर: तेजस्वी ने पीएम मोदी से मांगे 5000 करोड़, वायुसेना उतारने की मांग!

तेजस्वी का सीधा चैलेंज: "पीएम मोदी खुद बिहार आएं और देखें बाढ़ से मची तबाही का सच!"

बिहार। में आई प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका के बीच अब सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य के 20 जिलों में मची तबाही और जलभराव की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने बिहार के बाढ़ संकट को अत्यंत गंभीर बताते हुए केंद्र से 5,000 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की तत्काल मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार के राहत कार्यों को पूरी तरह नाकाफी करार देते हुए प्रधानमंत्री के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी हैं।नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में जमीनी हालात का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया है कि नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने सूबे के बड़े हिस्से को जलमग्न कर दिया है। राज्य का 76 से 80 प्रतिशत भूभाग इस समय बाढ़ की चपेट में है। लाखों की आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है और हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तथा जान-माल की भारी क्षति हुई है। राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर करारा प्रहार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा चलाए जा रहे बचाव और राहत कार्य प्रभावितों के लिए महज़ ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। एक बड़ी आबादी आज भी भोजन, स्वच्छ पेयजल, जीवन रक्षक दवाएं, बिजली और पशुचारे जैसी अत्यंत बुनियादी जरूरतों के लिए त्राहिमाम कर रही है।

ऊंट के मुंह में जीरा है राहत कार्य

तेजस्वी यादव ने बिहार से चुनकर गए एनडीए के केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने इन जनप्रतिनिधियों को असहाय और अक्षम करार देते हुए कहा कि वे न तो इस त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करवा पा रहे हैं और न ही बिहार के हक़ की विशेष सहायता राशि ला पा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राज्य की वित्तीय व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की वर्षों से चली आ रही विफलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि राज्य की आकस्मिक निधि (कंटिंजेंसी फंड) का इस्तेमाल आपदा के बजाय नियमित सरकारी खर्चों में कर दिया गया है, जिससे आज राहत कार्यों के लिए धन का टोटा पड़ गया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण और फंड के उपयोग की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग प्रमुखता से उठाई है।केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगों को विस्तार देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने अपील की है कि बिहार की भीषण बाढ़ को अविलंब राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और राज्य के पुनर्निर्माण तथा प्रभावितों की फौरी मदद के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज तत्काल जारी हो। उन्होंने सड़क संपर्क से पूरी तरह कटे हुए जलमग्न इलाकों में राशन और दवाएं पहुंचाने के लिए सेना तथा भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की तैनाती की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके साथ ही, संकटग्रस्त किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और पशुपालकों को विशेष आर्थिक मदद देने तथा राहत शिविरों में सभी बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है। समस्या के स्थायी निदान हेतु उन्होंने एक दीर्घकालिक ‘फ्लड रेजिलिएंस मिशन’ की शुरुआत करने का सुझाव दिया, जिसमें तटबंधों का आधुनिकीकरण, फ्लड फोरकास्टिंग और नेपाल-बांग्लादेश के साथ जल प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय समझौते शामिल हैं।पत्र के अंत में, नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस वर्तमान संकट को एक बड़े मानवीय दायित्व के रूप में देखें। उन्होंने अपील की है कि प्रधानमंत्री स्वयं बिहार का दौरा करें और जमीनी हालात का जायजा लें, ताकि संकट की इस घड़ी में बिहारवासियों को उचित संबल और न्याय मिल सके।

Related Articles

Back to top button