
गोपालगंज। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण गंडक नदी के जलस्तर में एक बार फिर उफान देखने को मिल रहा है। नदी के जलस्तर में हो रही इस वृद्धि और संभावित बाढ़ के खतरे को भांपते हुए गोपालगंज जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। जिले के लोगों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी समीर सौरभ ने गंडक नदी के दाएं तटबंध का सघन और मैराथन निरीक्षण किया। उन्होंने तटबंधों की सुरक्षा, कटाव निरोधक कार्यों और बाढ़ से निपटने की तैयारियों का जमीनी स्तर पर जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान डीएम ने उत्तर प्रदेश के अहिरौलीदान से लेकर बेतिया-गोपालगंज सीमा पर स्थित मंगलपुर पुल के दाएं हिस्से तक बने तटबंध की भौतिक स्थिति का जायजा लिया। इस क्रम में वह ग्राम विशम्भरपुर के समीप तटबंध के किलोमीटर-5 पर पहुंचे और बांध की मजबूती, रेन कट और पूर्व में कराए गए कटाव निरोधक कार्यों की बारीकी से जांच की। उन्होंने मौके पर मौजूद जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को दो टूक लहजे में हिदायत दी कि तटबंधों की सतत निगरानी की जाए। कहीं भी रैट होल (चूहों के बिल) या रिसाव दिखे तो उसे बालू की बोरियों से तुरंत दुरुस्त किया जाए। तटबंध की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर हुई मामूली लापरवाही भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अहिरौलीदान से मंगलपुर पुल तक चप्पे-चप्पे की हुई जांच
डीएम समीर सौरभ ने बताया कि वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में छोड़े जा रहे पानी के डिस्चार्ज पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है। फिलहाल बराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी नदी में आने की सूचना है। चिंता का विषय यह है कि गंडक के साथ-साथ गंगा नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ा हुआ है, जिससे नदियों के बैकवाटर का दबाव तटबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि, डीएम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह प्रशासन के नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। विशम्भरपुर से लेकर बैकुंठपुर तक तटबंधों की दिन-रात पहरेदारी की जा रही है। अधिकारी प्रतिदिन अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में पहुंचकर मुआयना कर रहे हैं। संभावित बाढ़ की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, पशुपालन और अन्य सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है। इन विभागों की तैयारियों की नियमित रूप से उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है। अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं, एंटी स्नेक वेनम (सांप काटने की दवा) और हैलोजन टैबलेट का पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया है।अंचलाधिकारियों (सीओ) और प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) को निर्देश दिया गया है कि वे निचले और दियारा क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में रहें। इसके अलावा, गोताखोरों व नावों की व्यवस्था, राहत शिविरों के लिए ऊंचे स्थानों का चयन और पॉलीथिन शीट व सूखा राशन के भंडारण की भी समीक्षा की गई है। आवश्यकता पड़ने पर एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को भी तुरंत मोबिलाइज करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित कर आम जनजीवन को सुरक्षित रखा जा सके।



