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सोन नदी में उफान से बाढ़ का खतरा! इंद्रपुरी बैराज से 4.74 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज, अगले कुछ घंटे बेहद अहम

इंद्रपुरी बैराज से 4.74 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज, निचले इलाकों में हाई अलर्ट

पटना। बिहार में इस वक्त बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों के लोगों की धड़कनें तेज कर दी हैं। जल संसाधन विभाग की ओर से जारी चार सितंबर की सुबह ग्यारह बजे तक की रिपोर्ट ने एक बार फिर से प्रशासनिक महकमे और आम जनता को सतर्क कर दिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न बैराजों से पानी का बहाव अलग-अलग रुख अख्तियार किए हुए है। सबसे चिंताजनक स्थिति सोन नदी की बनी हुई है, जहां इंद्रपुरी बैराज पर पानी का दबाव लगातार खतरनाक गति से ऊपर चढ़ रहा है।सोन नदी पर बने इंद्रपुरी बैराज से मिल रहे आंकड़े बताते हैं कि सुबह आठ बजे जो डिस्चार्ज चार लाख पैंतीस हजार दो सौ साठ क्यूसेक दर्ज किया गया था, वह महज तीन घंटे के भीतर यानी सुबह ग्यारह बजे तक बढ़कर चार लाख चौहत्तर हजार चार सौ उन्नतीस क्यूसेक तक जा पहुंचा। महज तीन घंटों के इस अंतराल में लगभग उनतालीस हजार क्यूसेक पानी का बढ़ना यह साफ इशारा करता है कि निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलेगा। हालांकि बैराज की कुल डिजाइन क्षमता चौदह लाख अट्ठावन हजार क्यूसेक है, जिसके मुकाबले यह आंकड़ा कम है, लेकिन लगातार ऊपर चढ़ता हुआ यह ट्रेंड किसी बड़े खतरे की आहट हो सकता है।

जल संसाधन विभाग ने जारी की चेतावनी

इसके विपरीत, कोसी और गंडक नदियों के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। वीरपुर बैराज पर कोसी नदी का डिस्चार्ज सुबह के वक्त दो लाख ग्यारह हजार आठ सौ पचास क्यूसेक था जो घटकर सुबह ग्यारह बजे दो लाख दो हजार तीन सौ दस क्यूसेक पर आ गया। इसी तरह वाल्मीकिनगर बैराज से गुजरने वाली गंडक नदी का बहाव भी एक लाख चौंतालीस हजार पांच सौ क्यूसेक से घटकर एक लाख बयालीस हजार आठ सौ क्यूसेक दर्ज किया गया। इन दोनों प्रमुख नदियों में पानी का घटता हुआ बहाव प्रशासन के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।नदियों के इस बदले मिजाज को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी और निगरानी बढ़ा दी है। सोन नदी के बढ़ते तेवर को भांपते हुए रोहतास, औरंगाबाद, अरवल और जहानाबाद जैसे जिलों के तटीय इलाकों में विशेष चौकसी बरती जा रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण जलस्तर रातों-रात बदल सकता है, इसलिए किसी भी ढिलाई की गुंजाइश नहीं है। प्रशासन लगातार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है और लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और सुरक्षित स्थानों पर अपनी आवाजाही सुनिश्चित करें।

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