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पटना हाईकोर्ट की सख्ती: पंचायत शिक्षकों के पेंशन व ग्रेच्युटी मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब

बिहार के लाखों पंचायत शिक्षकों के सेवानिवृत्ति लाभों (पेंशन और ग्रेच्युटी) को लेकर पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा और पंचायती राज विभाग से मांगा स्पष्ट जवाब।

पटना। बिहार के लाखों पंचायत शिक्षकों के सेवानिवृत्ति लाभ (पेंशन, ग्रेच्युटी आदि) के मुद्दे पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने इस मामले में शिक्षा विभाग और पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिवों को तलब करते हुए उनसे स्पष्ट जवाब मांगा है। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकल पीठ ने विनय कुमार श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। अदालत ने सुनवाई के दौरान एक बड़ा संवैधानिक सवाल उठाया कि क्या स्थानीय स्वशासन की अन्य इकाइयों के नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर पंचायत शिक्षक भी पेंशन और ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं या नहीं। अदालत में मामले की पैरवी करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243G, 11वीं अनुसूची के मद संख्या 17 और मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 23(3) के प्रावधानों को मुख्य आधार बनाया। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को संबंधित पंचायत सचिव को भी मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने की अनुमति दे दी।

15 सितंबर 2026 को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इस मामले को राज्य के लाखों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय माना है। मामले की गंभीरता और व्यापक प्रभाव को देखते हुए अदालत ने इसे 15 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। इस मामले पर आने वाला अंतिम फैसला बिहार के पंचायत शिक्षकों के लिए एक ऐतिहासिक नजीर बन सकता है।

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