
पटना। बिहार में महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य में एक ऐसा विशेष महिला विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, जहां छात्रा से लेकर कुलपति तक सभी पदों पर केवल महिलाओं की ही नियुक्ति होगी। इसके साथ ही, पटना के बापू सभागार में ‘समृद्ध महिला समृद्ध बिहार अभियान’ का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने पांच लाख महिलाओं के बैंक खातों में करीब 600 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किए।मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, प्रस्तावित महिला विश्वविद्यालय पूरी तरह से महिलाओं को समर्पित होगा। यहां न केवल छात्राओं को प्रवेश मिलेगा, बल्कि शिक्षक, प्रोफेसर, अधिकारी और प्रशासनिक पदों पर भी विशेष रूप से महिलाओं को ही नियुक्त किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस संस्थान की स्थापना से छात्राओं को उच्च शिक्षा और शोध के लिए एक सुरक्षित और समर्पित मंच मिलेगा।ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आधी आबादी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसके तहत वर्ष 2030 तक राज्य सरकार जीविका दीदियों के विकास और सशक्तिकरण पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस बड़ी धनराशि के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि महिला रोजगार योजना के तहत सहायता राशि की पहली और दूसरी किस्त लाभार्थियों को भेजी जा चुकी है।सरकार ने बेटियों को उद्यमिता और सुरक्षित माहौल देने के लिए तीन खास योजनाएं भी शुरू की हैं। इनमें ‘बेटी स्टार्टअप चैलेंज’ प्रमुख है, जिसके अंतर्गत अपना व्यवसाय शुरू करने वाली 2100 महिला उद्यमियों को 50 हजार से दो लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, आर्थिक तंगी के कारण छात्राओं का शोध कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए ‘बालिका पीएचडी फेलोशिप’ की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत 1000 छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। वहीं, स्कूल और कॉलेजों के आसपास छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘पुलिस दीदी योजना’ लागू की गई है। मुख्यमंत्री ने पुलिस दीदी की गश्त को सुगम बनाने के लिए 4700 दोपहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।



